नई दिल्ली.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा था कि इस बार की विजयादशमी खास है. उनके इस बयान को सर्जिकल स्ट्राइक से जोड़ कर देखा जा रहा है. दरअसल, सच्चाई भी यही है. लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक में तो हमारे जवानों ने आतंकियों को मार गिराया वहीं इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के अंदर के हालात  ‘लंका दहन’ की तरह हो गए हैं.
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सेना, सरकार और आतंकवादियों में ठनी

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान के अंदर सेना, सरकार और आतंकवादी संगठन आपस में ही एक दूसरे खिलाफ खड़े हो गए हैं. भारत की कूटनीति और सर्जिकल स्ट्राइक का असर पाकिस्तान पर साफ दिख रहा है. अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग हो चुके पाकिस्तान की सरकार इसका ठीकरा सेना पर फोड़ रही है. 
पंजाब के मुख्यमंत्री और आईएसआई चीफ के बीच ठनी
एक उच्चस्तरीय बैठक में आतंकवादियों पर कार्रवाई को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ और आईएसआई चीफ रिजवान के अहमद के बीज जमकर झड़प की खबरें हैं. पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएसआई और सेना आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में अड़ंगा लगाते हैं.
अपनी ही पार्टी में घिरे नवाज
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल(एन) के सांसद राणा मुहम्मद अफजल ने सरकार से पूछा है कि अखिर हाफिज सईद कौन सा अंडे देता है जो हम उसे पाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर हम चारो ओर से घिरे हैं. नवाज को पार्टी के लोगों को डर सता रहा है कि दो साल बाद होने वाले चुनाव में इसका खामियाजा न भुगतना पड़ जाए.”
सेना को आदेश- करो आतंकियो पर कार्रवाई
भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते नवाज शरीफ ने सेना से कहा है कि आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करो. लेकिन जो सेना खुद ही आतंकियों को संरक्षण दे रही हो वह कैसे कार्रवाई करेगी.
सेना ने ठहराया सरकार को जिम्मेदार
वहीं पाकिस्तान में हर नीति पर हस्तक्षेप करने वाली सेना ने का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में पाकिस्तान के अलग-थलग पड़ जाने के पीछे सरकार जिम्मेदार है. सेना का कहना है कि नवाज शरीफ सरकार ने मुद्दे को ठीक से नहीं उठाया है. वहीं सेना को इस बात का भी डर है कि कहीं उसके अधिकार सीमित न कर दिए जाएं.
आतंकवादी संगठनों में डर और नाराजगी 
अभी तक जिन आतंकवादियों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान भारत के खिलाफ अघोषित लड़ाई शुरू कर रखी थी, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उनको भी लग गया है कि अगर इस बार फिर कोई बड़ा हमला हुआ तो भारत ऐसी कार्रवाई से नहीं चूकेगा इसलिए वह सीमा पर जाने से डर रहे हैं.
वहीं 29 सितंबर की रात हुई कार्रवाई में मारे गए पाकिस्तानी जवानों को सम्मान के साथ दफनाया गया जबकि आतंकवादियों के शवों को घसीटते हुए ट्रक में लाद कर चुपचाप दफना दिया गया. इससे आतंकवादियों को लग गया है कि सेना उनकी कोई मदद नहीं करेगी सिर्फ इस्तेमाल करती है.