नई दिल्ली. भारतीय सेना की विकलांगता पैंशन में कोई कटौती नहीं होगी. केंद्र सरकार ने सोमवार को सशस्त्र बलों की विकलांगता पैंशन में कमी से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए कहा कि उसने तो 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार 90 प्रतिशत सशस्त्र बलों के लिए उसमें उल्लेखनीय वृद्धि की है.
 
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वहीं बताया जा रहा है कि यदि सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई में कोई सैनिक गंभीर रूप से घायल होकर रिटायर होता है तो उसकी पेंशन में कटौती की जाएगी. सूत्रों ने बताया कि अधिकारी रैंक या जूनियर कमीशन अधिकारियों की विकलांगता पेंशन में 14 से 30 फीसदी तक का इजाफा किया गया है
 
बता दें कि पहले ऐसी खबरें आ रही थी कि मोदी सरकार ने सैनिकों की पेंशन में 18 हजार रुपए प्रति महीने की कटौती की है. इस कटौती का फरमान सर्जिकल स्ट्राइक के अगले दिन ही जारी किया गया. सरकार के फरमान के मुताबिक अगर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे किसी ऑपरेशन के दौरान कोई जवान बुरी तरह चोटिल हो जाता है और 100 विकलांगता की श्रेणी में आ जाता तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा और पेंशन भी 27,200 रुपए प्रति महीने कर दिया जाएगा. जबकि पहले सैनिकों को 45,200 रुपए पैंशन मिलती थी यह खबर मीडिया में आने के बाद सरकार की काफी आलोचना हुई थी.
 
सरकारी सूत्रों के अनुसार सातवें वेतन आयोग ने युद्ध में घायल सैनिकों के लिए ऐसी कोई अनुशंसा नहीं की है. बल्कि युद्ध के अलावा किसी मिशन में गंभीर रूप से घायल हुए सैनिकों की विकलांगता पेंशन बढ़ाई गई है. वहीं पर्सनल बिलो ऑफिसर रैंक (पीबीओआर) और जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर्स (जेसीओ) के लिए विकलांगता पेंशन में14 फीसदी से लेकर 30 फीसदी तक बढ़ोतरी का लाभ देने की खबरें आ रही है. 
 
बताया जा रहा है कि 90 फीसदी सैनिकों की विकलांगता पेंशन बढ़ाई जा चुकी है. आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सिपाही की विकलांगता पेंशन 9282 रुपए से और हवलदार की पेंशन 10,542 रुपए से बढ़कर 12 हजार रुपए हो जाएगी. नायक की पेशन भी 9680 रुपए से बढ़कर 12 हजार रुपए हो जाएगी.