नई दिल्ली. चीन ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर बैन के लिए भारत के आवेदन पर दूसरी बार विरोध किया है. चीन ने कहा है कि भारत के आवेदन में मसूद अजहर को लेकर अलग-अलग बातें कहीं गई हैं. साथ ही चीन ने इस फैसले से संबंधित पक्षों के मुद्दो के चर्चा के लिए विचार-विमर्श के लिए और समय मिल जाएगा.
 
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चीन ने बैन का किया विरोध
मसूद अजहर पर बैन के विरोध को लेकर भारत की निंदा पर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत ने दूसरी बार बैन के विरोध पर कहा था कि इससे दुनिया में खतरनाक संदेश जाएगा. चीन ने कहा कि भारत ने मार्च में दिए आवेदन संयुक्त राष्ट्र की आतंक विरोधी समिति के अनुरूप नहीं है. दिया गया आवेदन को संयुक्त राष्ट्र की कमेटी के प्रस्ताव के अनुरूप होना चाहिए.
 
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पाकिस्तान की मदद कर रहा है चीन
बता दें कि कि 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में केवल चीन ने ही मसूद अजहर पर बैन का विरोध किया है. पिछले सप्ताह भी चीन ने दूसरी बार भारत के रेजॉलूशन में बाधा डालने का काम किया है. दरअसल अगर मसूद को संयुक्त राष्ट्र की आतंक विरोधी समिति आतंकवाद घोषित कर देती है तो यूएन के सदस्य देश के नाते पाकिस्तान को मसूद और उसके संगठन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी. पाकिस्तान ऐसा करना नहीं चाहता, जिसमें चीन उसकी मदद कर रहा है.
 
 
तीन महीने के लिए और बढ़ाया आवेदन
बता दें कि पठानकोट हमले के बाद मसूद पर बैन के लिए भारत के आवेदन पर चीन ने वीटो का इस्तेमाल करके छह महीने पहले भी रोक लगा दी थी. ये इस सप्ताह में दूसरी बार उसने रोक को 3 महीने के लिए और बढ़ा दिया है.
 
मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित न करने पर विदेश मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने कहा है कि हमने संयुक्त राष्ट्र की कमिटी से कहा है कि मसूद अजहर को आतंकी घोषित किया जाएगा, अगर यह संभव न हो पाया, तो दुनिया को इसका खतरनाक संदेश जाएगा. विकास स्वरुप ने कहा कि अच्छे और बुरे आतंकवाद में फर्क नहीं किया जा सकता है. मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने की भारत की मांग को 14 देशों का समर्थन मिला गया है, सिर्फ एक देश (चीन) ही जो इस पर रोक लगाए हुए है. आतंकी संगठनों को संकेत मिलने चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब बर्दाश्त नहीं कर सकता.