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Exclusive: ट्रिपल तलाक का केंद्र ने SC में किया विरोध, कहा- यह महिलाओं के साथ भेदभाव है

Exclusive: ट्रिपल तलाक का केंद्र ने SC में किया विरोध, कहा- यह महिलाओं के साथ भेदभाव है

By आशीष सिन्हा | Updated: Friday, October 7, 2016 - 21:07

Centre government files Affidavit in Supreme Court against triple divorce

Exclusive: ट्रिपल तलाक का केंद्र ने SC में किया विरोध, कहा- यह महिलाओं के साथ भेदभाव हैCentre government files Affidavit in Supreme Court against triple divorceFriday, October 7, 2016 - 21:07+05:30
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने ट्रिपल तलाक मामले का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर हलफनामा दाखिल करते हुए कहा है कि ट्रिपल तलाक महिलाओं के साथ लैंगिक भेदभाव है.
 
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केंद्र ने कहा कि पर्सनल लॉ के आधार पर किसी को संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता. हलफनामे में कहा गया है कि महिलाओं के साथ हो रहे लैंगिक भेदभाव को रोकना जरूरी है, उनकी गरिमा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.
 
इससे पहले ट्रिपल तलाक के मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था. हलफनामे में बोर्ड ने कहा था कि पर्सनल लॉ को सामाजिक सुधार के नाम पर दोबारा से नहीं लिखा जा सकता और तलाक की वैधता सुप्रीम कोर्ट तय नहीं कर सकता है. 
 
 
पहले कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट यह मामला तय कर चुका है. मुस्लिम पर्सनल लॉ कोई कानून नहीं है जिसे चुनौती दी जा सके, बल्कि यह कुरान से लिया गया है. यह इस्लाम धर्म से संबंधित सांस्कृतिक मुद्दा है.
 
बोर्ड ने हलफनामा में कहा था कि तलाक, शादी और देखरेख अलग-अलग धर्म में अलग-अलग हैं. एक धर्म के अधिकार को लेकर कोर्ट फैसला नहीं दे सकता. कुरान के मुताबिक तलाक अवांछनीय है लेकिन जरूरत पड़ने पर दिया जा सकता है.
 
इस्लाम में यह पॉलिसी है कि अगर दंपती के बीच में संबंध खराब हो चुके हैं तो शादी को खत्म कर दिया जाए. तीन तलाक की इजाजत है क्योंकि पति सही निर्णय ले सकता है, वह जल्दबाजी में फैसला नहीं लेते. तीन तलाक तभी इस्तेमाल किया जाता है जब वैलिड ग्राउंड हो.
First Published | Friday, October 7, 2016 - 17:04
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Web Title: Centre government files Affidavit in Supreme Court against triple divorce
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