नई दिल्ली.   सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की हाजी अली दरगाह के अंदर महिलाओं के जाने के मामले में कहा है कि यह दिक्कत वाली बात है. कोर्ट ने पूछा है कि सबरीमाला मंदिर और इस मामले में क्या अंतर है.

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इसके साथ ही अगली सुनवाई में दरगाह न्यास को ‘प्रोग्रेसिव’ रुख के साथ आने के लिए कहा है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई हाईकोर्ट के फैसले पर 17 अक्टूबर तक रोक बढ़ा दी है. 
 
क्या है मामला
मुंबई की हाजी अली दरगाह में हर साल लाखों लोग आते हैं. 2011 तक यहां पर महिलाओं को भी अंदर जाने की इजाजत थी. लेकिन 2012 में दरगाग ट्रस्ट ने महिलाओं के अंदर जाने पर यह कहकर रोक लगा दी कि यह शरियत कानून के खिलाफ है. 
 
मुंबई हाईकोर्ट से मिली इजाजत
ट्रस्ट के इस फरमान के विरोध में महिलाओं से जुड़े एक संगठन ने मुंबई हाईकोर्ट में चुनौती दी. 26 अगस्त 2015 को मुंबई हाईकोर्ट ने ट्रस्ट के खिलाफ फैसला सुनाया और कहा कि महिलाओं पर रोक पूरी तरह असंवैधानिक है.
 
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया ट्रस्ट
हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ट्रस्ट ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल की है. जिस पर अब सुनवाई चल रही है. शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को अंदर न जाने देना और पुरुषों को इजाजत, ये दिक्कत वाली बात है. फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है. मामले की सुनवाई अब 17 अक्टूबर को होगी.