नई दिल्ली. भारतीय जांबाजों ने पाकिस्तान को उसी की भाषा में समझाकर एक बेहतर संदेश दिया है. लंबे समय से इसी की प्रतीक्षा की जा रही थी. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में विशेष तौर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित कर और फिर अचानक पाकिस्तान में उनके घर जाकर साफ कर दिया था कि भारत पाकिस्तान से दोस्ती चाहता है. दुश्मनी से कोई बातचीत संभव नहीं है. बावजूद इसके बार-बार पाकिस्तानी सेना भारत के सब्र की परीक्षा ले रही थी.  सीजफायर का उल्लंघन, गुरदासपुर में आतंकी घटना, पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला और फिर उड़ी में 19 भारतीय सैनिकों की शहादत ने आखिरकार भारत को कड़ी कार्रवाई करने पर विवश कर ही दिया.
 
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उड़ी हमले के बाद जिस तरह भारत सरकार अपने देश के लोगों के अलावा अंतराष्ट्रीय दबाव झेल रही थी उसने स्पष्ट कर दिया था कि आने वाले दिनों में बहुत कुछ होगा. भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हर एक विषय पर सोची समझी रणनीति पर काम किया. पहले संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को उसकी ही बात पर घेरा. फिर सिंधु जल समझौता और मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस करने की झिड़की दी. साथ ही साथ पीओके में घुसकर एक साथ कई आतंकी शिविरों को नष्ट भी किया. पाकिस्तान को भी इस बात का अंदेशा था, इसीलिए वह बार-बार परमाणु हमले की धमकी दे रहा था. पर भारत सरकार ने इस सर्जिकल स्ट्राइक से स्पष्ट कर दिया है कि अब छेड़ोगे तो छोडेंगे नहीं.
 
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम बात यह रही कि भारत सरकार ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सर्जिकल स्ट्राइक करने की बात स्वीकार की. यह अपने आप में बहुत बड़ी डिप्लोमेटिक जीत है. जहां एक तरफ पाकिस्तान को भी फोन पर इस सर्जिकल स्ट्राइक की सूचना दी गई, वहीं अमेरिका, रूस सहित कई अन्य देशों को भी पूरे अभियान के बारे में बताया गया. सभी को जानकारी दी गई कि कैसे भारतीय जांबाजों ने पीओके में आतंकियों का सफाई अभियान चलाया है.
 
पाकिस्तान की हालत सबसे बुरी है. वह न तो यह स्वीकार कर पा रहा है कि भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर कितने आतंकियों को मारा और न ही यह स्वीकार कर पा रहा है कि पीओके में सही में आतंकी प्रशिक्षण शिविर चल रहे हैं. पाकिस्तान इस वक्त सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे पर हर तरफ से घिरा हुआ है. पूरी दुनिया में उसकी फजीहत हो रही है. पर भारत के चंद तथाकथित बड़े बुद्धिजीवी भारत सरकार पर ही प्रश्चचिह्न लगाने पर तुले हैं. मीडिया के भी कुछ सो-कॉल्ड बड़े पत्रकार और हमेशा मोदी नीति के खिलाफ आग उगलने वाले चंद लोग भी भारत से इस सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगने में जुटे हैं. ये वैसे ही लोग हैं जो अपने होने का सबूत भी अपने परिजनों से मांगने में गुरेज नहीं करेंगे.
 
ऐसे लोग ही भारत सरकार को नीचा दिखाकर खुद को लोकतांत्रिक देश का सबसे बड़ा पैरोकार मानने लगे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक-एक बात जिन्हें बुरी लगती है, ऐसे राजनीतिक लोगों ने भी इस सर्जिकल स्ट्राइक की बड़ाई की है. उन्होंने भी उड़ी का साहसिक बदला लेने के लिए भारतीय जांबाजों की जांबाजी को सराहा है. पर कुछ तथाकथित लोग अब भी भारत सरकार को कठघरे में खड़ा करने की छद्म मुहिम चलाने में जुटे हैं. यह ऐसा वक्त है जब पूरे भारत को एकजुट रहने की जरूरत है, वहीं ऐसे लोगों से सावधान रहने की भी जरूरत है.
 
लोकतंत्र में फ्रीडम और एक्सप्रेशन के नाम पर कुछ भी ऊलजुलूल बोलने वालों के बहकावे में आए बिना हमें भारत सरकार को सपोर्ट करने की जरूरत है. राजनीतिक तौर पर चाहे सोनिया गांधी हों राहुल गांधी या फिर अरविंद केजरीवाल. सभी ने एक स्वर में भारत सरकार के इस सख्त कदम की प्रशंसा की है. इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत सरकार अपनी इस मुहिम को आगे भी जारी रखेगी. अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर जिस तरह का माहौल है उसमें युद्ध की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता है. ऐसे में हर एक भारतीय को सावधान और सजग रहने की जरूरत है.
 
पाकिस्तान की भाषा में सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत भारत सरकार से मांगने वालों के लिए यह करारा तमाचा होगा जब पाकिस्तान खुद यह बताए कि उसके कितने आतंकी लॉन्चिंग पैड धवस्त हुए हैं और कितने आतंकी मारे गए हैं. हालात ये हैं कि जहां भारतीय जांबाजों ने कार्रवाई की है वहां पाकिस्तानी सेना रात के समय जाकर आतंकियों के शवों की शिनाख्त में जुटी है. पाकिस्तानी मीडिया दबे स्वर में यह खबरें प्रकाशित कर रही है. जबकि वहां की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस प्रोपेगेंडा में जुटी है कि कैसे भारतीय सेना को इस दौरान नुकसान पहुंचाया गया है.
 
पाकिस्तान के एक राष्ट्रीय चैनल ने पिछले दिनों एक डॉक्टर्ड वीडियो चलाकर यहां तक दिखा दिया कि कैसे पाकिस्तानी सेना ने उनकी सीमा में घुस आए भारतीय सैनिकों को सबक सिखाया. तो हे भारत के तथाकथित बुद्धिजिवियों! थोड़ा सा मंथन जरूर करो. पाकिस्तान से तुम्हें सीख लेने की जरूरत है कि वहां की मीडिया इन हालातों में सरकार के साथ कैसे खड़ी है. अब भविष्य में भारत सरकार से सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगने से पहले एक बार जरूर पाकिस्तान भी होकर आ जाओ ताकि तुम्हें पता चल सके कि राष्ट्र प्रेम क्या होता है और संकट के समय अपने सरकार के साथ किस तरह खड़ा रहा जाता है. भारतीय सेना को तो जो करना था उसने कर दिया. पूरा भारत चाहता है कि सेना बिना बताए भी ऐसा ही करती रहे. फिलहाल, नरेंद्र मोदी और उनकी टीम को राजनीतिक स्तर और सैन्य स्तर पर इतनी बड़ी जीत के लिए बधाई.