नई दिल्ली. भारतीय सेना ने बुधवार को पीओके में घुसकर आतंकियों के कई ठिकाने तबाह कर दिए. सर्जिकल स्ट्राइक की एक स्पेशल टीम ने 4 घंटे टक चले इस ऑपरेशन को अंजाम देते हुए आतंकियों के 7 ठिकाने सहित 38 आतंकियों को मार गिराया. 
 
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सेना द्वारा आतंकियों को बचाने के चक्कर में 2 पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए. इस ऑपरेशन में पैरा स्पेशल फोर्स हेलिकॉप्टर में सवार होकर पीओके में तीन किलोमीटर अंदर जाकर आतंकियों को नुकसान पहुंचाया. बता दें कि भारतीय जवानों में किसी को भी खरोंच तक नहीं आई. सेना ने उरी में आर्मी कैंप पर हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है. 
 
भारतीय सेना ने ऐसा पहली बार नहीं किया है. इसके पहले आर्मी के कमांडो ने 2015 में म्यांमार में भी ऐसा किया था. कुछ उग्रवादियों ने 4 जून 2015 को मणिपुर के चंदेल जिले में भारतीय सेना पर हमला किया था, जिसमें 18 जवानों की जान चली गई थी.  
 
उसके बाद ऑपरेशन की प्लानिंग के लिए एनएसए अजित डोभाल ने 6 जून को प्रधानमंत्री के साथ बांग्लादेश जाने का अपना प्रोग्राम भी टाल दिया था. हमले के बाद डोभाल कुछ दिन तक मणिपुर में रहकर इंटेलिजेंस से मिले और इन्पुट्स पर निगरानी रख रहे थे. इस हमले की पूरी योजना प्रधानमंत्री की जानकारी में तैयार हुई थी और प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी अनुमति दी थी.
 
जांच के बाद आर्मी को पता चला था कि उग्रवादी हमला करके म्यांमार सीमा में छिप गए थे. म्यांमार सीमा में पैराकमांडो ने घुसकर उग्रवादियों के दो कैंप नष्ट कर दिए. इस ऑपरेशन में करीब 100 उग्रवादी मारे गए थे. 40 मिनट तक चले इस ऑपरेशन में 70 कमांडो शामिल थे. सेना ने पहली बार ऐसा किया था. ऑपरेशन शुरु करने के बाद और समाप्ती से पहले म्यांमार को इस बात की जानकारी दी गई थी. हालांकि इस हमले में भी भारतीय सेना को कोई नुकसान नहीं हुआ था.