नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में जीएसटी सचिवालय और जीएसटी काउंसिल की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है. यह काउंसिल जीसएटी से जुड़े तमाम मामलों का निपटारा करेगी.
 
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काउंसिल के गठन के बाद केंद्रीय वित्तमंत्री इसके अध्यक्ष होंगे, वहीं राज्य वित्त मंत्री इसके सदस्य होंगे. राज्य वित्त मंत्रियों के पास ही जीएसटी के रेवेन्यू की जिम्मेदारी होगी. काउंसिल के सभी फैसले दो तिहाई बहुमत होने पर ही लिया जाएगा. जीएसटी सचिवालय दिल्ली में होगा और इसके सेक्रेट्री सरकार के राजस्व सचिव होंगे.
 
राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने आज इसकी घोषणा की. उन्होंने कहा, ‘मैंने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि वे अपने राज्यों से जीएसटी काउंसिल के लिए सदस्यों का नाम हमें दें.’ उन्होंने बताया कि जीएसटी काउंसिल की पहली बैठक 22 और 23 सितंबर को होगी, इसका फैसला वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लिया है.
 
क्या करेगी काउंसिल?
काउंसिल का काम जीएसटी की दरें तय करना, उत्पादों पर सेवा कर लगाना, पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स लगाने का समय तय करना, जीएसटी के दायरे से छूट तय करना आदि होगा.
 
11 सितंबर से काउंसिल में कामकाज होने की संभावना है. हालांकि काउंसिल के गठन को सरकार ने मंजूर तो दे दी लेकिन आगे का रास्ता आसान नहीं है, क्योंकि सरकार को अपने हर एक फैसले पर राज्यों की सहमति प्राप्त करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.