कराची. सार्क देशों के गृहमंत्री सम्मलेन में भारतीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस्लामाबाद में खड़े होकर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई थी, उसी तरह अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सार्क देशों के शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान की बखिया उधेड़ने की तैयारी में हैं. भारतीय उच्चायुक्त गौतम बम्बावले ने कहा है कि नरेंद्र मोदी सार्क देशों के शिखर सम्मेलन में शामिल होने नवंबर में इस्लामाबाद जा सकते हैं. बम्बावले ने यह बात कराची में आयोजित एक कार्यक्रम में कही है.
 
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उन्होंने कहा, ‘मैं भविष्य के बारे में तो नहीं बता सकता हूं लेकिन अभी के लिए मैं इतना बता सकता हूं कि पीएम मोदी नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाले सार्क शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकते हैं.’ हालांकि अभी यह पूरी तरह से साफ नहीं है कि पीएम मोदी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे या नहीं.
 
जम्मू कश्मीर के मामले को लेकर पाकिस्तान और भारत के बीच जिस तरह का तनाव पैदा हो गया है उसे देखते हुए यह भी कहा जा रहा है कि मोदी इस सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे. 
 
वहीं बम्बावले ने कश्मीर मामले को भारत का आंतरिक मुद्दा बताते हुए कहा है कि पाकिस्तान और भारत में काफी समस्याएं हैं. दोनों देशों को अपनी समस्याओं का समाधान करना चाहिए. कश्मीर मुद्दे को छोड़कर व्यापार बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए.
 
बता दें कि पाकिस्तान और भारत के रिश्तों में तल्खी की वजह से सरकार ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को सार्क देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में पाकिस्तान नहीं भेजा था, उनकी जगह वित्त सचिव शक्तिकांत दास ने इस सम्मेलन में शिरकत की थी.
 
 
कहा जा रहा है कि अगर मोदी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे तो आतंकवाद के मुद्दे पर जरूर बात की जाएगी. अगस्त में गृहमंत्री सम्मेलन के दौरान इस्लामाबाद में अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाया जो पाकिस्तान को रास नहीं आया था. उन्होंने कहा था कि किसी भी देश का आतंकी किसी भी कीमत पर शहीद नहीं हो सकता.  
 
राजनाथ ने कहा था, ‘आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है. आतंकवाद ही नहीं बल्कि उन देशों के खिलाफ भी कठोर कदम उठाने की जरूरत है जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं. सार्क क्षेत्र में आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है.’