नई दिल्ली. वाटर टैंकर घोटाले मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रविवार को दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर जाकर उनसे पूछताछ की और उन्हें 18 सवालों की एक लिस्ट सौपीं जिसके जबाब शीला दीक्षित को जल्दी ही देने हैं. बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की 49 दिन की सरकार में शीला दीक्षित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था और शीला दीक्षित की सरकार पर 400 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था. 

 
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क्या कहा शीला दीक्षित ने ?
इस मामले में शीला दीक्षित ने कहा, ‘उनके पास ACB की टीम आई थी लेकिन जबाब देने के लिए कोई समयसीमा नहीं बताई. कई ऐसी बातें हैं जो मुझे याद ही नहीं हैं. जब मैं उचित समझूंगी तब जबाब दूंगी.’ उन्होंने आगे कहा कि टैंकर खरीद का फैसला सामूहिक था जिसमे कई अधिकारी और एजेंसियां भी थीं.

 
कपिल मिश्रा से भी हो चुकी है पूछताछ
इस मामले में ACB ने दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष कपिल मिश्रा से भी पूछताछ हो चुकी है. आदमी पार्टी की सरकार ने वाटर टैंकर घोटाले की जांच कराई लेकिन आरोप ये लगा की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी उसे 11 महीने तक दबाये रखा. रिपोर्ट में कहा गया कि इस घोटाले के लिए शीला दीक्षित जिम्मेदार है.
 
क्या था मामला ?
2010-11 के दौरान वाटर टैंकर घोटाला सामने आया था. शीला के सीएम रहते जिन कालोनियों में पानी की पाइप लाइनें नहीं हैं, वहां वाटर सप्लाई के लिए टैंकर किराए पर लिए गए थे. स्टेनलेस स्टील के 450 टैंकर किराए पर लिए जाने थे. इस काम के लिए सरकार ने 2010 में टेंडर निकाला सात साल के लिए जारी टेंडर में कुल लागत 50.98 करोड़ रुपए आंकी गई थी. 2010 का टेंडर रद्द कर अगले डेढ़ साल में चार बार टेंडर निकाले गए और इसकी लागत 50.98 करोड़ से बढ़ा कर 637 करोड़ रुपए कर दी गई. दिसंबर 2011 में 10 साल के लिए टैंकर किराए पर लिए गए.