नई दिल्ली. देश में बिजली उद्योग की हालत अजब पहेली जैसी हो गई है. बिजली बेचने वाली कंपनियां घाटे में हैं, बिजली खरीदने वाले उद्योगपति और दुकानदार औसत से ज्यादा कीमत चुकाते हैं, फिर भी बिजली के लिए डीजल जेनरेटर पर निर्भर हैं. किसानों और आम लोगों का रोना ये है कि उन्हें सब्सिडी वाली बिजली नहीं मिलती.
 
इंडिया न्यूज़-IPPAI की पड़ताल
देश में बिजली की दशा और दिशा की पड़ताल करने के लिए  ने इंडिपेंडेंस पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया(IPPAI) के साथ ‘उम्मीदों की रोशनी’ के नाम से सीरीज शुरू की है, जिसमें यही पता लगाने की कोशिश की गई कि आखिर बिजली सेक्टर से जुड़े सभी लोग परेशान क्यों हैं?
 
 
IPPAI देश में ऊर्जा क्षेत्र की पहली थिंकटैंक है, जो 1994 से भारत में ऊर्जा क्षेत्र की सच्चाई पर खुली बहस के लिए निष्पक्ष मंच के रूप में काम कर रही है.
 
 
ये कैसा धंधा, जिसमें सबका घाटा?
 
देश में एक चौथाई से ज्यादा बिजली का तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान (एग्रीगेट टेक्निकल एंड कॉमर्शियल लाइन लॉस) हो रहा है.
 
 
जानकार मानते हैं कि बिजली सेक्टर की बदहाली की असली वजह यही है कि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में ढंग से काम नहीं हुआ. इसका सीधा असर बिजली कंपनियों, उपभोक्ताओं और देश की अर्थव्यवस्था पर हो रहा है.