नई दिल्ली. पासपोर्ट के संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोरर्ट के अनुसार कोई पासपोर्ट बनाने वाला अधिकारी आवेदन के उनके ट्रेवलिंग डॉक्यूमेंट्स पर पिता का नाम लिखने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है. सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये बातें कहीं. अपने पुराने फैसले को दोहराते हुए कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई कानूनी जरुरत नहीं है. जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं 
 
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार चिकाकर्ता ने अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने के लिए दिल्ली के एक रिजनल ऑफिस में आवेदन किया था. लेकिन आवेदन में याची ने अपने पिता का नाम नहीं लिखा था जिसके कारण पासपोर्ट ऑफिस ने पासपोर्ट रिन्यूअल के आवेदन को खारिज कर दिया था. साथ ही पासपोर्ट ऑफिस ने उसके पहले से बने पासपोर्ट को भी खारिज कर दिया था. जिसकी वैधता जून 2017 तक थी. 
 
अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि 2007 में पासपोर्ट उसे 10 साल के लिए इश्यू किया गया था. लेकिन 2003 में उसकी मां का पिता से तलाक हो गया है, जिसके कारण वो अब पासपोर्ट पर आपने पिता का नाम नहीं लिखना चाहता है. 
 
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि, उसे ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के लिए जाना है. लेकिन वर्तमान पासपोर्ट की वैधता कोर्स के खत्म होने से पहले ही समाप्त हो जाएगी. इसलिए पासपोर्ट को रिन्यू कर दिया जाये. कोर्ट में बहस के दौरान पासपोर्ट अधिकारियों ने दलील दी थी कि पिता का नाम पासपोर्ट आवेदन पर लिखना अनिवार्य है. क्योंकि बिना इसके सॉफ्टवेयर आवेदन को स्वाकार नहीं करेगा. सुनवाई के बाद कोर्ट ने पासपोर्ट अधिकारियों को तीन दिन में याचिकार्ता को पासपोर्ट उपलब्ध कराने का आदेश दिया है.