नई दिल्ली. इस साल मार्च के महीने में यमुना के तट पर आयोजित हुए श्री श्री रविशंकर के विश्व सांस्कृतिक महोत्सव कार्यक्रम ने यमुना नदी को भारी नुक्सान पहुंचाया है. यह बात नेशनल ग्रीन  ट्रायब्यूनल को 7 सदस्यों वाले एक पैनल ने बताई है.
 
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एनजीटी द्वारा स्थापित किये गए इस पैनल के अनुसार आर्ट ऑफ़ लिविंग संसथान द्वारा यमुना के तट पर आयोजित कार्यक्रम ने यमुना को सिर्फ नुक्सान ही नहीं हुआ है बल्कि इसने यमुना को बर्बाद कर दिया है. 
 
पैनल ने एनजीटी के प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतन्त्र कुमार की पीठ से कहा है कि कार्यक्रम के आयोजन स्थल की मिट्टी अब पूरी तरह से ठोस और वनस्पति रहित हो गयी है. समिति ने अपनी 47 पन्नो की रिपोर्ट में बताया है कि जहां कार्यक्रम के लिए मंच लगाया गया था उस जगह की मिट्टी ठोस है और उसे ठोस बनाने के लिए किसी अन्य पदार्थ का भी इस्तमाल किया गया हो ऐसा संभव है.
 
बताया दें कि एनजीटी ने जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर के नेतृत्व में सात सदस्यों वाली विशेषज्ञ समिति को इस साल मार्च में हुए विश्व संस्कृति महोत्सव के स्थल का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था. जिसकी रिपोर्ट में यह सब बातें कही गयी है.