नई दिल्ली. आजादी का नाम आते ही लंदन के इंडिया हाउस का नाम सबसे पहले आता है, जो कभी क्रांतकारियों का तीर्थस्थल हुआ करता था. आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर इंडिया न्यूज ने पहली बार इंडिया हाउस से देश की जनता को रुबरु कराया.
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
अंग्रेजी हुकुमत की ठीक नाक के नीचे क्रांतिकारियों के गुरू श्याम जी कृष्ण वर्मा ने लंदन में ही एक बिल्डिंग खरीद कर ऐतिहासिक इंडिया हाउस की स्थापना की और लंदन आने वाले वीर सावरकर से लेकर भीकाजी कामा तक और भाई परमानंद से लेकर कर्जन वाइली को लंदन में ही मारने वाले मदनलाल धींगरा तक हर उस क्रांतिकारी को इंडिया हाउस में पनाह मिली जो देश की आजादी का सपना संजोये हुये था.
 
आजादी के 55 साल तक किसी भी सरकार ने श्याम जी कृष्ण वर्मा की अस्थियों की सुध नहीं ली थी. तब सन् 2003 में श्याम जी कृष्ण वर्मा और उनकी पत्नी की अस्थियों को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्विट्ज़रलैंड सरकार से अनुरोध करके भारत मंगवाया और मांडवी (भुज) में हूबहू इंडिया हाउस जैसी इमारत बनाकर उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी.
 
लंदन में आजादी के 70 साल बाद पहली बार कोई भारतीय न्यूज़ चैनल “इंडिया न्यूज़” लंदन स्थित इंडिया हाउस पहुंचा.