नई दिल्ली. देश की 70 वीं सालगिरह के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले से न्यायपालिका पर कुछ नहीं बोला, जिससे देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया टीएस ठाकुर निराश दिखे.  उन्होंने कहा कि पीएम का भाषण डेढ घंटा सुना. उम्मीद थी कि इंसाफ के लिए भी कुछ कहेंगे. लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बोला. अंग्रेजों के वक्त भी दस साल में इंसाफ मिल जाता था लेकिन अब सालों लग जाते हैं.
 
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उन्होंने कहा कि यह चिंतन करने का दिन है कि हमने किस हद तक आजादी के दीवानों की कुर्बानी को समझा, सच्चाई में तब्दील किया. एक वक्त था कि अमेरिका से खराब अनाज आता था, अब एक्सपोर्ट करते हैं. चंडीगढ़ के रास्ते में अनाज का अंबार लगा है, जो खराब भी हो जाता है क्योंकि रखने की जगह नहीं है. आज हिंदुस्तान सुपरपावर बनने की और है. 1947 में आबादी 32 करोड़ थी, 10 करोड़ गरीबी रेखा के नीचे थे, अब 125 करोड है तो गरीबी रेखा से नीचे 40 करोड़ हो गई है.
 
उन्होंने कहा कि सरकार ने गरीबी रेखा का पैमाना बनाया है वो सिर्फ दो वक्त की रोटी का बनाया है. 26 रुपये गांवों में और 52 रुपये शहर में तय किया है. इससे क्या होगा? ये बडी चुनौती है. MA पास आदमी चपरासी की नौकरी करने को मजबूर है. सही में आजादी गरीबी से और शोषण से आजादी है लेकिन 70 साल में गरीबी के नीचे 40 करोड़ लोगों को ले आए.
 
इस बीच कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा- हम सबकी आजादी जिसमें न्यायपालिका की आजादी, प्रेस की आजादी शामिल है, इसके लिए प्रतिबद्ध हैं. न्यायपालिका में 4000 से ज्यादा वेकेंसी हैं, जो मुझे भी चिंतित करती हैं. हम न्यायपालिका के साथ मिलकर काम करेंगे. सुप्रीम कोर्ट के आदेशासनुसार हम जजों की नियुक्ति के लिए MOP तैयार कर रहे हैं. गुड गवर्नेंस के लिए न्यायपालिका का मजबूत होनी जरूरी है.