नई दिल्ली. कल देश स्वतंत्रता दिवस की 70वीं वर्षगांठ मनाएगा. परंपरा के अनुसार स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश को संबोधित किया. अपने संबोधन में प्रणब मुखर्जी ने यह प्रमुख बातें की.
 
1. हाल के दिनों में देश में समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ रही हिंसा की घटनाओं का हवाला देते हुए राष्ट्रपति से इसे राष्ट्रीय चरित्र के खिलाफ बताया. उन्होंने इससे सख्ती से निपटे जाने की बात कही.
 
2. राष्ट्रपति ने कहा कि ये घटनाएं कुछ असामाजिक तत्वों के पथ के भटकाव के परिणाम हैं. उन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल की बात करते हुए कहा कि इस दौरान मैने कुछ अशांत, विघटनकारी और असहिष्णु शक्तियों को सिर उठाते हुए देखा है. उन्होंने भारत के शासनतंत्र पर भरोसा जताते हुए कहा कि इन तत्वों को निष्क्रिय कर दिया जाएगा. 
 
3.  राष्ट्रपति ने संसद में पास हुए जीएसटी बिल के बारे में कहा कि संसद के अभी सम्पन्न हुए सत्र में निष्पक्षता और श्रेष्ठ परिचर्चाओं के बीच वस्तु एवं सेवा कर लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक का पारित होना हमारी लोकतांत्रिक परिपक्वता पर गर्व करने के लिए पर्याप्त है.
 
4. देश के बहुलवाद पर राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि एक-दूसरे की संस्कृतियों, मूल्यों और आस्थाओं के प्रति सम्मान एक ऐसी अनूठी विशेषता है, जिसने भारत को एक सूत्र में बांध रखा है.
 
5. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद की इन पंक्तियों को दोहराया कि ‘वभिन्न प्रकार के पंथों के बीच सहभावना आवश्यक है. यह देखना होगा कि वे साथ खड़े हों या एकसाथ गिरें, एक ऐसी सहभावना जो परस्पर सम्मान न कि अपमान, सद्भावना की अल्प अभिव्यक्ति को बनाए रखने से पैदा हो.’ 
 
6. देश के युवाओं के बारे में बात करते हुए राष्ट्रपति ने सरकार की डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओ का लाभ उठा कर आत्मनिर्भर बनने की बात कही. 
 
7. उन्होंने कहा कि जब पूरा भारत विकास करेगा तभी भारत विकास करेगा. उन्होंने इसमें पिछड़े वर्गों को भी शामिल करने की बात कही. 
 
8. राष्ट्र्पति ने अपने संबोधन में  केंद्र सरकार की विदेश नीति की तारीफ की और कहा कि हमारी विदेश नीति में काफी सक्रीयता आई है. उन्होंने इसे अफ्रीका और एशिया के साथियों के साथ संबंधों को मजबूत करने वाला बताया. 
 
9. उन्होंने आतंकवाद को विश्व शांति के लिए ख़तरा बताते हुए कहा कि ‘आतंकवाद की जड़ें लोगों को धर्म के नाम पर कट्टर बनाने में छिपी हैं.’