नई दिल्ली. राज्यसभा में संशोधित मैटरनिटी बैनिफिट बिल पास हो गया है. अब निजी कंपनियों में काम करने वाली महिलाओं को 12 हफ्ते की जगह 26 हफ्ते की मैटरनिटी लीव मिल सकेगी.
 


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सरकारी कर्मचारियों को ये सुविधा पहले से ही मिल रही है. नए बिल में ये भी प्रस्ताव है कि जो महिला किसी बच्चे को गोद लेती है तो उसे 12 हफ्ते की छुट्टी दी जाएगी. साथ ही 50 से ज्यादा कर्मचारियों वाले दफ़्तर को बच्चों की देखभाल के लिए अपने यहां एक क्रैच बनाने और मां के लिए घर से ही काम करने का प्रावधान करने की सलाह दी गयी है. 
 
यह 10 या इससे अधिक कर्मचारियों को काम पर रखने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगा. इससे संगठित क्षेत्र में 18 लाख महिला कर्मचारी लाभांवित होंगी.
 
 
मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 महिलाओं को उनके प्रसूति के समय रोजगार का संरक्षण करता है और वह उसे उसके बच्चे की देखभाल के लिए कार्य से अनुपस्थिति के लिए पूरे भुगतान का हकदार बनाता है.