नई दिल्ली. दिसंबर, 2012 के निर्भया कांड के बाद 2013 में कड़े किए गए बलात्कार कानून के बाद देश में पहली बार जबरन ओरल सेक्स के एक मामले में चर्चित फिल्म पीपली लाइव के सह-निर्देशक महमूद फारूकी को दोषी मानते हुए 7 साल की सज़ा सुनाई गई है जो रेप के मामलों में निर्धारित न्यूनतम सज़ा के बराबर है. रेप के कुछ गंभीर मामलों में न्यूनतम सज़ा 10 साल भी है.

 
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फारूकी पर मार्च, 2015 में अपने आवास पर अमेरिका की एक छात्रा के साथ जबरन ओरल सेक्स करने का केस दर्ज हुआ था जिसमें सबूत के तौर पर फारूखी द्वारा छात्रा से मेल पर मांगे गए कई माफीनामे भी शामिल थे. छात्रा एक रिसर्च के सिलसिले में भारत आई थी और कॉमन फ्रेंड के जरिए फारूकी से मिली थी.
 
छात्रा का आरोप था कि फारूकी ने उसे डिनर पर अपने घर बुलाया था जहां उसके साथ जबर्दस्ती संबंध बनाया गया. छात्रा ने कोर्ट के सामने अपने बयान में कहा था कि उसने जबर्दस्ती का विरोध इस डर से नहीं किया कि कहीं उसकी हालत निर्भया कांड जैसी न हो जाए.
 
 
छात्रा की वकील वृंदा ग्रोवर ने सज़ा के ऐलान के बाद मीडिया से कहा कि देश में ओरल सेक्स को रेप के दर्जे का अपराध मानते हुए पहली बार कोई सज़ा सुनाई गई है जिसका व्यापक असर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा.
 
फारूकी की पत्नी अनुषा रिज़वी ने पति को कोर्ट से सज़ा मिलने के बाद कहा कि वो न्याय के लिए आगे और लड़ेंगी. रिज़वी ने कहा कि निचली अदालत के फैसले को वो हाईकोर्ट में चुनौती देंगी.