नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के गुजरात में अब बीजेपी अपनी पकड़ खोती जा रही है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी के सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि अगर इस वक्त गुजरात में विधानसभा चुनाव हुए तो पार्टी को 182 में से 60-65 सीटों के साथ ही संतुष्ट होना पड़ेगा. यह सर्वे गुजरात में फैले दलित आंदोलन के बाद किया गया है.
 
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सर्वे के बाद आनंदीबेन का इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार आरएसएस ने यह सर्वे दिखाकर ही गुजरात की पहली महिला सीएम आनंदीबेन पटेल को इस्तीफा देने के लिए तैयार किया था. इसके उन्होंने सोमवार को पार्टी को अपना इस्तीफा सौंप दिया.
 
गुजरात में BJP को घाटा
सर्वे में यह बात सामने आई है कि 2017 में होने वाले चुनाव में दलित और पाटीदार आंदोलन के कारण बीजेपी को 18 सीटों का नुकसान हो सकता है. सर्वे के अनुसार, आदिवासी भी सरकारी नौकरियों में आरक्षण या जमीन आवंटन को लेकर आंदोलन छेड़ सकते हैं. इससे पहले आरएसएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बीजेपी को दिसंबर 2015 के पंचायती चुनाव में कम से कम 104 सीटों का नुकसान हुआ है. इसका प्रमुख कारण पाटीदार आंदोलन था. शहरी क्षेत्रों की तुलना में बीजेपी को ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा नुकसान हुआ था.
 
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ऊना घटना से गुजरात में BJP को झटका
बीजेपी के लिए नई परेशानी गुरुवार को बीएसपी सुप्रीमो मायावती के ऊना दौरे से खड़ी हो रही है. ऊना में दलितों की बर्बर तरीके से पिटाई ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था. मायावती का ऊना दौरा बीजेपी के लिए सिर्फ गुजरात में ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश चुनावों में भी मुसीबत खड़ी कर सकता है. गुजरात में 7.1 फीसदी वोट बैंक वाली दलित आबादी की इससे पहले कभी बीजेपी ने इतनी चिंता नहीं की जितनी उसे इस बार है. यूपी में नजदीक आते चुनाव के बीच गुजरात में 20 फीसदी पटेल आबादी का भी सरकार के खिलाफ होना पार्टी के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है.