नई दिल्ली. सातवें वेतन आयोग पर आए नोटिफिकेशन में प्रमोशन और प्रदर्शन को जोड़ने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं. कर्मचारी संगठन इसका तीखा विरोध कर रहे हैं. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से पहले ही कई कर्मचारी संगठन नाराज थे.
 
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अब यह संगठन नोटिफिकेशन में प्रमोशन और प्रदर्शन को जोड़ने के फैसले के खिलाफ खड़े हो गए हैं. इनका कहना है कि पहले ही प्रमोशन के नियम पेशेवर नहीं हैं और अब ज्यादा परेशानी होगी. कर्मचारियों की नाराजगी सबसे ज्यादा प्रमोशन के नए मापदंडों को लेकर है.
 
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नए नियमों के लागू होने के बाद किसी भी कर्मचारी को तभी तरक्की मिलेगी जब उसका काम ‘वेरी गुड’ की श्रेणी में आएगा. अब तक “गुड” आने से ही तरक्की का रास्ता खुल जाता था. इस नियम के बारे में रेलवे के कर्मचारियों का आरोप है कि प्रमोशन के नियम पहले से ही पेशेवर नहीं हैं और बहुत कुछ बड़े अधिकारियों की मनमर्जी से होता है. उनका दावा है कि इस फैसले से चमचागिरी को और बढ़ावा मिलेगा और अब प्रमोशन मिलना अधिक मुश्किल हो गया है.