नई दिल्ली. भारत की विदेश नीति में एकाएक ऐसी आक्रामकता आई है कि चीन सकते में है. चीन की सारी हेकड़ी हिंदुस्तान ने एक झटके में निकाल दी है. दरअसल भारत ने चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ के तीन सीनियर पत्रकारों को भारत छोड़ने का फरमान सुना दिया है.
 
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चीनी विदेश मंत्रालय ने इसका कड़ा विरोध करते हुए भारत को चेतावनी तक दे दी कि इसके गंभीर परिणाम होंगे लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय टस से मस नहीं हुआ. तीनों पत्रकारों का वीज़ा 31 जुलाई 2016 को खत्म हो रहा है और इन तीनों को 31 जुलाई से पहले उल्टे पांव चीन लौटना होगा. भारत के इस आक्रामक रुख से चीन के अहंकार को जबर्दस्त ठेस पहुंची है.
 
चीनी पत्रकारों को क्यों निकालना चाहता है भारत?  
 
दरअसल चीन की न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के ब्यूरो चीफ वू जियांग, चीफ कोरेसपोंडेंट तांग लू और रिपोर्टर शी योंगएंग का वीजा रेन्यू करने से भारत ने इनकार कर दिया है. ये तीनों चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी के पत्रकार हैं इसलिए इन्होंने अपनी एजेंसी से संपर्क कर भारत पर दबाव बनाने को कहा लेकिन भारत सरकार ने किसी भी दबाव के सामने झुकने से इनकार कर दिया.
 
दरअसल इन तीनों पत्रकारों की हरकतें और जीवन शैली संदिग्ध थीं. इन तीन में एक दिल्ली का ब्यूरो चीफ है तो दो मुंबई ब्यूरो में काम करते हैं. ये लोग पहचान छुपाकर कर्नाटक में तिब्बती कैंपों तक पहुंच गए थे. सूत्रों का दावा है कि सरकार को इनके जासूस होने का शक है जिसके चलते इन्हें भारत से विदा करने का फैसला लिया गया है. संभवत: ये पहला मौका है जब भारत ने चीन के किसी नागरिक को इस तरह से देश छोड़ने का फरमान सुनाया हो.
 
भारत के कदम से तिलमिलाया चीन
 
भारत से चीनी पत्रकारों को निकाले जाने की खबर को चीन में बेहद गंभीरता से लिया गया है. चीन के प्रमुख अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत के इस कदम को गलत बताते हुए कहा है कि चीनी नागरिकों और पत्रकारों को वीजा देने की प्रक्रिया में भारत हमेशा से मुश्किलें पैदा करता रहा है. चीनी अखबार ने ये भी लिखा कि भारत शक्की दिमाग का है. गौरतलब है कि चीन की सरकार आज भी कुछ प्रदेशों के भारतीय नागरिकों को नत्थी वीजा ही देती है.
    
क्या एनएसजी ग्रुप में भारत के विरोध का बदला है ये
 
चीनी मीडिया में छाया हुआ है कि तीन चीनी पत्रकारों को देशबदर करने का भारत का फैसला असल में चीन के उस कदम का बदला है जिसमें उसने एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध किया था. याद रहे कि बीते दिनों भारत ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में एंट्री के लिए जोरदार कोशिश की थी जिसका चीन ने खुलकर विरोध किया था. 
 
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बहरहाल पहले चीन के विरोधी वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइलें बेचने का सख्त कदम, फिर भारत की तरफ से लद्दाख में 100 टी-72 टैंकों की तैनाती और अब भारत से तीन चीनी सरकारी पत्रकारों को निकालना साफ करता है कि भारत को अब चीन की चिंता नहीं रही और चीन की धमकियों और गीदड़ भभकियों को अब वो और ज्यादा सहने के मूड में नहीं है.