नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि चिट्ठियां लिखने से बात नहीं बनेगी. जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, ‘हमें शिक्षामित्र मामले में हिंदी और अंग्रेजी में बहुत चिट्ठियां आ रही हैं, लेकिन हमने इस चिट्ठियों के लिए वेस्ट पेपर बास्केट यानी रद्दी की टोकरी का इंतजाम किया है.’
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
इस मामले पर बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक मिश्रा ने शिक्षा मित्रों के वकील मीनेस दुबे से कहा कि सभी को बहस के लिए मौका मिलेगा. कोर्ट ने कहा, ‘अगर आप सभी लोग खड़े रहेंगे तो सुनना मुश्किल हो जाएगा और ऐसे में सुनवाई होना संभव नहीं है. इसलिए वही लोग खड़े हों जिनको बहस करनी है.’
 
अगली सुनवाई 24 अगस्त को
 
बता दें कि जस्टिस रोहिंग्टन नरीमन ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया. दरअसल अपने वकालत कैरियर के दौरान वो शिक्षा मित्रों के लिए बहस कर चुके थे. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख निर्धारित की है.
 
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कड़े निर्देश दिए थे कि अगली सुनवाई के दिन एक भी शिक्षामित्र कोर्ट में नहीं आना चाहिए और अगर एक भी शिक्षामित्र कोर्ट में घुसा तो मामले की सुनवाई नहीं की जाएगी.
 
कोर्ट ने यह आदेश सुनवाई के दिन कोर्ट में शिक्षामित्रों की भीड़ को देखते हुए दिया था. पीठ ने कहा था, ‘कोर्ट के अंदर 15-20 लोगों के खड़े होने की जगह है और 300 आदमी कोर्ट कक्ष में आ जाते हैं, ऐसे में सुनवाई बहुत मुश्किल होती है. वहीं कुछ लोग रोने की स्थिति में होते हैं, ऐसे में हम सुनवाई नहीं कर सकते.’ कोर्ट ने इससे पहले भी कहा था कि सुनवाई के दौरान लोग आंसू बहाने लगते हैं और उम्मीद करते हैं कि फैसला उनके पक्ष में होगा.
 
कोर्ट ने कहा कि सुनवाई को दौरान परिसर में मेले का माहौल रहता है, जो शिक्षामित्र कोर्ट में नहीं घुस पाते वे कॉरिडोर को घेरे रहते हैं और जिन्हें कोर्ट रूम का पास नहीं मिल पाता वे सुप्रीम कोर्ट के बाहरी लॉन में टीवी चैनलों के कैमरों के पास पसरे रहते हैं.
 
Stay Connected with InKhabar | Android App | Facebook | Twitter
 
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पिछले साल से इस मामले में सुनवाई कर रही है. कोर्ट के आदेश पर पिछले साल 1,37,000 शिक्षामित्रों को समायोजित कर उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक के पद पर लिया गया है. शिक्षा मित्रों के लिए पेश वकील मीनेश दूबे की दलील है कि जो छात्र TET पास हैं, उन्हें नौकरी से नहीं हटाया जा सकता.