नई दिल्ली. मुम्बई की 24 हफ्ते की गर्भवती महिला को गर्भपात की सुप्रीम कोर्ट ने इजाज़त दे दी है. कोर्ट ने मुम्बई के KE मेडिकल हॉस्पिटल की रिपोर्ट के आधार पर गर्भपात की इजाजत दी. महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को मुम्बई के KE मेडिकल हॉस्पिटल की मेडिकल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सील बंद लिफ़ाफ़े में दी. रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला की जाँच के बाद ये पता चला है कि अगर वो गर्भ धारण किये रहती है तो उसको मानसिक और शारीरिक तौर पर खतरा होगा.\
 
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केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जरनल ने कोर्ट में कहा कि मेडिकल टेर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी एक्ट 1971 के सेक्शन 3 के मुताबिक किसी महिला की 20 हफ्ते के बाद गर्भपात नहीं हो सकता क्योंकि उस समय उसके भीतर एक जान होती है और उनको ख़त्म करने की इजाजत कानून नहीं देता. तब कोर्ट ने कहा ये सेक्शन 3 के तहत लाइफ vs लाइफ हो जाता है. जिसपर AG ने कहा लेकिन ये मामला सेक्शन 5 के तहत आता है. जहाँ अपवाद स्वरूप कहा गया कि अगर बच्चे की माँ की जान खतरे में है तो गर्भपात हो सकता है. 
 
बता दें कि पिछले शुक्रवार कोर्ट ने आदेश जारी देते हुए कहा कि मुम्बई के KE मेडिकल हॉस्पिटल में महिला का सुबह 10 बजे चेकअप होगा और सरकार सोमवार तक रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करेगी. सोमवार को मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ये तय करेगा की महिला के गर्भपात की इजाजत दी जा सकती है या नहीं. 
 
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सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ़ किया था हम ये बाद में तय करेंगे कि मेडिकल टेर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी एक्ट 1971 जिसके मुताबिक 20 हफ़्ते से ज़्यादा गर्भवती महिला का गर्भपात नहीं हो सकता उसमें संसोधन हो सकता है या नहीं.