नई दिल्ली. स्मृति ईरानी का कपड़ा मंत्रालय भी अब विवाद में आ गया है. मानव संसाधन विकास मंत्री के तौर पर कई बार विवादों में रह चुकीं स्मृति के कपड़ा मंत्रालय की संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी ने OBC-SC के लिए आरक्षित NIFT निदेशकों के पद पर भी सवर्णों को नियुक्त कर दिया है.
 
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निफ्ट ने दिल्ली, कोलकाता, जोधपुर, शिलॉंग और श्रीनगर कैंपस के निदेशक पद के लिए 16 दिसंबर, 2015 में भर्ती का विज्ञापन निकाला जिसमें ये 5 पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाने थे. प्रतिनियुक्ति मतलब, सरकार के ही किसी भी विभाग में काम कर रहे अधिकारी इस पद पर सेलेक्ट हो सकते थे. आवेदन की आखिरी तारीख 8 जनवरी, 2016 तय की गई.
 
 
विज्ञापन निफ्ट की वेबसाइट पर देखने के लिए क्लिक करें- http://www.nift.ac.in/Downloads/advertisement_16dec.pdf
 
8 जनवरी, 2016 को निफ्ट ने 16 दिसंबर वाले विज्ञापन के संदर्भ में एक संशोधित विज्ञापन निकाला जिसमें दिसंबर वाले विज्ञापन के 5 कैंपस के साथ भुवनेश्वर कैंपस को भी जोड़कर कुल 6 कैंपस डायरेक्टर पद के लिए 29 जनवरी तक आवेदन करने कहा गया. 
 
संशोधित विज्ञापन से सीधी बहाली का रास्ता खुला, आरक्षित थे 6 में 3 पद
 
इस संशोधित विज्ञापन में सबसे पहले तो दिसंबर वाले विज्ञापन की सिर्फ प्रतिनियुक्ति वाली शर्त को बढ़ाकर सीधी बहाली यानी कॉन्ट्रैक्ट का विकल्प भी जोड़ दिया गया. संशोधित विज्ञापन में साफ-साफ लिखा गया कि कैंपस डायरेक्टर के 6 पद में 3 पद सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए हैं और बाकी 2 पद ओबीसी और 1 पद एससी वर्ग के आवेदकों के लिए. 
 
 
विज्ञापन निफ्ट की वेबसाइट पर देखने के लिए क्लिक करें- http://www.nift.ac.in/Downloads/Corrigendum_8jan.pdf
 
मतलब 6 कैंपस में से 3 कैंपस को सामान्य वर्ग का निदेशक मिलना चाहिए था और 2 कैंपस को ओबीसी और 1 कैंपस को एससी निदेशक. संशोधित विज्ञापन में एक नोट लिखा गया था कि डेपुटेशन यानी प्रतिनियुक्ति से पद भरे जाने की स्थिति में आरक्षण लागू नहीं होगा. मतलब कि अगर 6 कैंपस के लिए डेपुटेशन वाले अधिकारी चुन लिए जाते तो ओबीसी या एससी का आरक्षण लागू नहीं होता.
 
इंटरव्यू के लिए बुलाए गए, सामान्य- 12, ओबीसी-2, एससी- 2
 
आवेदन पहुंचे और फिर छह महीने बाद 5 जुलाई को निफ्ट ने 16 आवेदकों को शॉर्टलिस्ट करके 12 जुलाई को इंटरव्यू के लिए बुलाया. 5 जुलाई की शाम तक स्मृति ईरानी को कपड़ा मंत्री बनाने की खबर आ चुकी थी और अगले दिन यानी 6 जुलाई को स्मृति ने कपड़ा मंत्री का प्रभार भी ले लिया था.
 
 
इंटरव्यू लिस्ट निफ्ट की वेबसाइट पर देखने के लिए क्लिक करें- http://www.nift.ac.in/Downloads/campusdirector_5july16.pdf
 
इंटरव्यू के लिए बुलाए गए 16 शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों में 12 सामान्य वर्ग, 2 ओबीसी और 2 एससी उम्मीदवार थे. इन 16 में 5 प्रतिनियुक्ति के जरिए आना चाहते थे जबकि 11 सीधी बहाली के रास्ते. सीधी बहाली में 8 जनवरी के संशोधित विज्ञापन से आरक्षण लागू किया गया था.
 
इंटरव्यू हो गया और 20 जुलाई को बहाली का आदेश निकला तो सब सन्न रह गए. 6 कैंपस में से श्रीनगर को छोड़कर बाकी 5 कैंपस के निदेशकों की नियुक्ति का आदेश जारी हो गया लेकिन इन 5 कैंपस में नियुक्त कोई भी निदेशक ओबीसी या एससी वर्ग का नहीं है. सारे के सारे सामान्य वर्ग के.
 
 
नियुक्ति आदेश निफ्ट की साइट पर देखें- http://www.nift.ac.in/Downloads/Result%20Campus%20Directors.pdf
 
वंदना नारंग को दिल्ली, कुलदीप सिंह गिल को शिलॉंग, राजीव पंत को कोलकाता, मोनिका अग्रवाल को भुवनेश्वर और विजया देशमुख को जोधपुर कैंपस का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. श्रीनगर कैंपस के डायरेक्टर पद पर नियुक्ति का आदेश नहीं निकला है.
 
पांच कैंपस को मिले निदेशक, सारे के सारे सवर्ण वर्ग के
 
जिन पांच को निदेशक बनाया गया है उनमें पांचों सामान्य वर्ग के हैं. राजीव पंत और कुलदीप सिंह गिल प्रतिनियुक्ति वाले हैं. बाकी तीनों डायरेक्टर सीधी बहाली यानी कॉन्ट्रैक्ट वाले हैं जिस बहाली मंह आरक्षण लागू होना था. अगर प्रतिनियुक्ति वाले 2 पद को आरक्षण से फ्री कर दें तो 4 कैंपस बचते हैं. 
 
जनवरी वाले संशोधित विज्ञापन में आरक्षण 50-50 रखा गया था. 6 पद में 3 सामान्य और 3 ओबीसी-एससी आरक्षित. कायदे से 6 में 3 पद आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को जाना चाहिए था लेकिन अगर प्रतिनियुक्ति वाले 2 पद को घटाकर कुल 4 पद भी कर लें तो इनमें से 2 पर आरक्षण लागू होना चाहिए था.
 
आरक्षण खत्म करने के लिए सोशल मीडिया पर कपड़ा मंत्रालय की किरकिरी
 
निफ्ट ने इन 4 में 3 कैंपस को सामान्य वर्ग का डायरेक्टर दे दिया है. इस लिहाज से आरक्षित पदों में कम से कम 1 पद तो गायब हो ही चुका है. अगर श्रीनगर का डायरेक्टर भी आरक्षित वर्ग से नहीं हुआ तो पूरी तरह से आरक्षित पदों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवार काबिज हो जाएंगे. श्रीनगर अगर आरक्षित कर भी दिया गया तो एससी या ओबीसी में किसी एक को मिलेगा तो दूसरे का हक मारा जाएगा.
 
सोशल मीडिया पर निफ्ट डायरेक्टरों की नियुक्ति को लेकर कपड़ा मंत्रालय की किरकिरी हो रही है और लोग कह रहे हैं कि जब तक संतोष गंगवार कपड़ा मंत्री थे, आरक्षित पदों के साथ कोई गड़बड़ी नहीं की गई. संतोष गंगवार खुद भी ओबीसी परिवार से आते हैं.
 
निफ्ट की तरफ से या कपड़ा मंत्रालय की तरफ से इस विवाद पर अभी तक कोई सफाई या बयान नहीं आया है इसलिए आरक्षित पदों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को डायरेक्टर बनाने की सरकारी वजह समझ में नहीं आ रही है.