नई दिल्ली. बच्चों को किसी और स्कूल में भेजे जाने की बात पर सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल के खिलाफ सख्त टिप्पणी की है और कहा है कि बच्चे फुटबाल नहीं हैं कि उन्हें इधर से उधर फुटबॉल की तरह फेंका जाएं. दरअसल लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 13 गरीब बच्चों को एडमिशन दिया था लेकिन स्कूल ने जैसे ही कोर्ट में दलील दी कि बच्चों को कहीं और भेजा जा सकता है तब कोर्ट ने उक्त टिप्पणी की. अदालत ने मामले में स्कूल और यूपी सरकार दोनों से जवाब भी दाखिल करने को कहा है.
 
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राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत तमाम तरह के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के लिए इस बात की अनिवार्यता है कि वह 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला दे. आर्थिक तौर पर गरीब बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटें रिजर्व की गई है. पिछली सुनवाई के दौरान सिटी मोंटेसरी ने यह कहते हुए दाखिला देने से इनकार कर दिया था कि लखनऊ में और कई स्कूल हैं ऐसे में सिर्फ सिटी मोंटेसरी ही क्यों चुना गया है.
 
लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 13 गरीब बच्चों को दाखिला देने को कहा था. इसके बाद सिटी मोंटेसरी ने इस मामले में 13 बच्चों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दाखिला दिया था. दाखिला के बाद सिटी मोंटेसरी स्कूल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि लखनऊ में कई स्कूल हैं जो ऐसे आर्थिक तौर पर कमजोर बच्चों के घरों के पास हैं ऐसे में इन बच्चों को उन स्कूलों में भी शिफ्ट किया जा सकता है. लेकिन यूपी सरकार ने इस दलील का विरोध किया और कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए.
 
यूपी सरकार के वकील एम. शमशाद ने कहा कि बच्चों को स्कूल से बाहर नहीं किया जाना चाहिए. यूपी सरकार का यही फैसला है कि बच्चें सिटी मोंटेसरी में ही पढ़ें. तब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्कूल के रवैये पर नाराजगी जताई और कहा कि बच्चे फुटबॉल नहीं हैं कि उन्हें इधर से उधर किया जाए.
 
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गौरतलब है कि पिछले साल 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के सिटी मॉनटेशरी स्कूल को निर्देश दिया था कि वह ईडब्ल्यूएस कैटगरी के 13 बच्चों का दाखिला ले. स्कूल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे देने से इनकार कर दिया था और इस मामले में यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है. हाई कोर्ट ने स्कूल को निर्देश दिया था कि वह 13 बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करे.
 
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान स्कूल की ओर से दलील दी गई थी कि यूपी सरकार ने नियम तय किए हैं कि अगर सरकारी स्कूलों में सीट भर जाए उसके बाद ही प्राइवेट स्कूलों में ईडब्ल्यूएस कैटगरी में दाखिला दिया जाएगा.
 
वहीं बच्चों की ओर से पेश एडवोेकेट अशोक अग्रवाल ने दलील दी थी कि राइट टू एडुकेशन एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों को भी ईडब्ल्यूएस कैटगरी में बच्चों को दाखिला दिया जाएगा और सरकार खर्च वहन करेगी. इस मामले में हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने 13 बच्चों को दाखिला दिए जाने का निर्देश दिया गया था.