नई दिल्ली. 70 साल की बुजुर्ग मां सुप्रीम कोर्ट से अपनी मासूम बेटी के लिए इंसाफ की आस लगाए बैटी है. उसकी मांग है कि उनकी मानसिक रूप से अविकसित मासूम बेटी के साथ बलात्कार करने वाले आरोपी पर पास्को के तहत मुकदमा चलाया जाए.
 
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गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पास्को एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी 18 साल से कम उम्र के इंसान को बच्चा माना जाये. आखिर 18 साल का मतलब क्या है. क्या केवल शारीरिक विकास से ही ये पैमाना तय हो सकता है.
 
कोर्ट ने कहा कि हमारा मानना है अगर कोई भी इंसान भले ही वो शारीरिक रूप से 18 से अधिक का हो, लेकिन अगर मानसिक रूप से वो अभी बच्चा है तो उसे बच्चा ही माना जाये. मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा क्यों केवल शारीरिक आधार पर ये तय किया जाता है कि वो व्यस्क हो गया है क्यों न मानसिक आधार पर भी इसे देखा जाये.
 
जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा पॉस्को एक्ट 18 साल से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा के लिए बना है, लेकिन उन बच्चों का क्या जो शारीरिक रूप से बड़े तो हो गए लेकिन उनको ये नहीं पता ये संसार और दुनिया क्या है. ऐसे मामलों में कोर्ट की भूमिका क्या होनी चाहिए. क्यों न ऐसे मामलों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष भेजा जाये जो तय करे कि बच्चा मानसिक रूप से बड़ा हुआ है या नहीं, जिसके बाद बचाव पक्ष की तरफ से कहा गया कि ये मामला पॉस्को के तहत नहीं आता क्योंकि लड़की बालिग है.
 
इसके बाद कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा हम ऐसे मामले की सुनवाई कर रहे है जहाँ एक मासूम के बलात्कार हुआ है जो उसका मतलब भी नहीं समझती. जस्टिस दीपक मिश्रा ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘मैंने ऐसे बच्चे देखे है जो शारीरिक रूप से बड़े तो हो जाते है लेकिन मानसिक नहीं.’ कोर्ट ने कहा जिस इंसान ने बच्ची के साथ रेप किया है वो इस बात को अच्छी तरह जानता था कि वो बच्ची इसका मतलब नहीं समझती.
 
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जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा संसद ने कानून बना दिया की 18 साल से कम उम्र के लोगों को ही नाबालिग माना जायेगा लेकिन ये हम तय करेंगे की ये शारीरिक के साथ-साथ मानसिक होगा या नहीं. कोर्ट में इस मामले की सुनवाई सोमवार को भी जारी रहेगी कोर्ट ने सभी पक्षों को कहा है कि वो अपना लिखित जवाब सोमवार को दाखिल करे.