लखनऊ. आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट किया जा सकता है. कयास लगाए जा रहे हैं कि गुरुवार शाम चार बजे गुलाम नबी आजाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे जिसमें शीला दीक्षित के नाम का औपचारिक ऐलान हो सकता है.
 
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बता दें, शीला दीक्षित का उन्नाव और कन्नौज से गहरा नाता रहा है. वे अपने आप को यूपी का पुत्रवधू भी बताती है. वे कन्नौज से एक बार सांसद भी रह चुकी हैं. हालांकि उसके बाद प्रदेश की सक्रिय राजनीति से वे दूर गई थीं.
 
15 सालों तक रहीं दिल्ली की CM
शीला दीक्षित कांग्रेस की कद्दावर नेताओं में एक हैं और उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री का पद 15 सालों तक संभाला है. दीक्षित राजीव गांधी की कैबिनेट में राज्यमंत्री भी रहीं थीं. राजनीतिक हलकों में पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि शीला दीक्षित को कांग्रेस यूपी में मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर सकती है. हालांकि प्रियंका गांधी का नाम भी इस पद के लिए चर्चा में रहा था.
 
UP की बहू हैं शीला
यूपी में प्रमुख चेहरे के लिए प्रशांत किशोर की तीसरी पसंद शीला दीक्षित थीं. शीला दीक्षित पंजाबी हैं. उनका जन्म कपूरथला में हुआ है और उनकी शादी उत्तर प्रदेश के ब्राहमण नेता उमाशंकर दीक्षित के बेटे से हुई थी तो इस लिहाज से शीला दीक्षित उत्तर प्रदेश में बहू मानी जाती हैं. शीला दीक्षित से जब इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यूपी की बहू हूं और मेरे ख्याल से यही काफी है. दीक्षित ने कहा कि मैं अक्सर ससुराल जाती रहती हूं.
 
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ब्राह्मणों के लिए शीला का चेहरा
जानकारों का मानना है कि कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक रहे ब्राह्मण समुदाय के लोग मंदिर-मंडल की राजनीति के उभरने के बाद बीजेपी के पाले में चले गये थे. इस बीच मायावती की बसपा को भी बड़ी संख्या में ब्राह्मणों का वोट मिलने लगा.