मुंबई. अपने विवादित भाषणों से आतंक को बढ़ावा देने के आरोपी जाकिर नाईक की 14 जुलाई को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर अभी सस्पेंस बरकरार है. जाकिर ने बयान जारी कर कहा है कि गुरुवार स्काइप के जरिए होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस अपने तय समय पर ही होगी. दरअसल मुंबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने बुकिंग कैंसिल कर दी है. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के कैंसिल होने की पुष्टि कर दी है, हालांकि उन्होंने इसकी वजहें अभी तक नहीं बताई है.
 
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जाकिर नाईक को सोमवार सुबह भारत लौटना था लेकिन गिरफ्तारी के डर से वो नहीं लौटे. जाकिर को सोमवार सुबह आठ बजे मक्का से भारत लौटना था. बता दें विवादों में आने के बाद जाकिर ने खुद बताया था कि वह 11 जुलाई को भारत लौटेंगे और 12 जुलाई को अपने उपर लगे आरोपों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सफाई देंगे. इस मामले में जाकिर नाईक ने बकायदा एक वीडियो शूट करके बताया था.
 
 
कौन हैं जाकिर नाईक
जाकिर का जन्म 1965 में मुंबई में हुआ. मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जाकिर ने 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की. इस संस्था का मकसद था गैर मुस्लिमों को इस्लाम का सही मतलब समझाना. इसी मकसद से जाकिर ने खुद दुनिया भर में घूम घूम कर कुरान और इस्लाम पर लेक्चर देना शुरू कर दिया. जाकिर नाइक पिछले 20 सालों में 30 से ज्यादा देशों में 2000 से भी ज्यादा सभाएं कर चुका है. जाकिर की वेशभूषा और भाषा दूसरे इस्लामिक धर्मगुरुओं से बिलकुल अलग है.
 
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कब-कब आया नाम  
 
2009 में न्यूयोर्क के सबवे में फिदायीन हमले की साजिश रखने के आरोप में गिरफ्तार नजीबुल्ला जाजी के दोस्तों ने बताया कि वो काफी वक्त तक डॉ नाईक की तकरीरों को टीवी पर देखता था.   
 
2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में आरोपी राहिल शेख भी डॉ. नाइक से प्रभावित था.   
 
2007 में बैंगलोर का एक शख्स कफील अहमद ग्लासगो एयरपोर्ट को उडाने की कोशिश करते हुए घायल हो गया. जांच में पता चला कि जिन लोगों की बातों से वो प्रभावित था उनमें से डॉ जाकिर नाइक भी एक थे.   
 
यही नहीं हाल ही में हैदराबाद में गिरफ्तार आईएस के 5 लोगों का सरगना इब्राहीम यजदानी न सिर्फ डॉ जाकिर से प्रभावित था बल्कि 2010 में वो उनके कैंप में शामिल हुआ था.