नई दिल्ली. संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस जीएसटी बिल को लेकर नरम पड़ सकती है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद की अहम मुलाकात के बाद ऐसे संकेत सामने आए हैं.
 
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सूत्रों के अनुसार 10 जनपथ पर इस अहम मीटिंग में कुछ देर के लिए प्रियंका गांधी भी शामिल हुईं. मीटिंग में यूपी चुनाव के साथ ही जीएसटी बिल पर खास चर्चा की गई. आजाद मंगलवार को जीएसटी पर पार्टी की लाइन के बारे में बयान दे सकते हैं.
 
मानसून सत्र में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस जीएसटी बिल को लेकर अपनी मुख्य मांग 18 फीसद टैक्स रेट पर कैप को संवैधानिक संशोधन में रखने पर नरम पड़ सकती है. हालांकि कांग्रेस अपनी मांगों पर सरकार से टैक्स रेट पर गारंटी चाहेगी.
 
कांग्रेस ने जीएसटी बिल पर अपनी तीन मांगें रखी हैं. पहला, जीएसटी पर संवैधानिक संशोधन बिल में ही टैक्स रेट का कैप 18 प्रतिशत निर्धारित किया जाए. दूसरा, जीएसटी विवादों के निपटारे के लिए प्राधिकरण का गठन हो. और तीसरा, उत्पादक राज्यों पर अतिरिक्त एक फीसदी टैक्स को वापस लिया जाए.
 
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 कांग्रेस की इन तीन मांगों की वजह से जीएसटी बिल कई संसद के सत्रों में पारित नहीं हो सका. कांग्रेस के रुख में बदलाव की वजह हाल के चुनावों में कांग्रेस की हार और राजनीतिक रूप से राज्यसभा में पार्टी का कमजोर होना माना जा रहा है.