नई दिल्ली. केरल के सबरीमला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि मंदिर में महिलाओं को न जाने देना उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन है. क्योंकि संविधान से लेकर वेद, उपनिषद कोई भी महिला और पुरुष में भेदभाव नहीं करते. बता दें कि केरल के इस मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है. 
 
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सोमवार को इसे चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की. तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि मंदिर पूजा का सार्वजनिक स्थल है. यहां महिलाओं को प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता. कोर्ट ने कहा कि ये गंभीर मामला है महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध कैसे लगाया जा सकता है. सुनवाई के दौरान मंदिर बोर्ड ने जवाब के लिए वक्त मांगा है. उसने इस मामले को संविधान पीठ को सौंपे जाने की मांग भी की. 
 
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मंदिर बोर्ड की इस मांग पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि उनकी बेंच यह मामला संविधान पीठ को सौंपने पर विचार कर सकती है. यदि वह ऐसा करेगी तो इससे पहले इस मामले में विस्तार से फैसला देगी. इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई सात नवंबर को होगी.