नई दिल्ली. केंद्र के साथ अधिकारों के विवाद पर दिल्ली सरकार की याचिका सुनवाई पर मंगलवार को भी सुनवाई नहीं हो सकी. आज सुप्रीम कोर्ट के एक और जज जस्टिस एल नागेश्वर राव ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया. इससे पहले कल जस्टिस जे एस खेहर ने खुद को सुनवाई से अलग किया था.
 
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कल जस्टिस खेहर के सुनवाई न करने की वजह से मामला उनकी अध्यक्षता वाली दो जजों की बेंच से हट गया था. आज रजिस्ट्री ने चीफ जस्टिस से निर्देश लेकर मामले को जस्टिस अनिल दवे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच के सामने लगाया. लेकिन जस्टिस नागेश्वर राव ने भी रजिस्ट्री को बताया कि वो इस मामले को नहीं सुन सकते.
 
रजिस्ट्री से इस बारे में जानकारी मिलने के बाद दिल्ली सरकार की वकील इंदिरा जयसिंह ने चीफ जस्टिस से मामले की सुनवाई के लिए जल्द से जल्द बेंच के गठन का आग्रह किया. चीफ जस्टिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि ईद की छुट्टी के बाद मामले की सुनवाई होगी.
 
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बता दें कि दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि वो केंद्र और दिल्ली सरकार के अधिकारों को स्पष्ट करे. दिल्ली सरकार का कहना है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं होने की वजह से राज्य की चुनी हुई सरकार को काम करने में दिक्कत आती है. इसलिए, सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 239A की व्याख्या करे. दिल्ली सरकार का कहना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट उसके अधिकार स्पष्ट नहीं कर देता, तब तक दिल्ली हाई कोर्ट को इस मसले से जुड़े 11 मामलों में फैसला देने से रोका जाए.