नई दिल्ली. यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है. केंद्र सरकार ने लॉ कमीशन को कहा है कि वो इस मामले को देखें की कैसे यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू किया जा सकता है. कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने लॉ कमीशन को चिट्ठी लिखी है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर आगे कदम बढ़ा चुकी है.
 
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क्या कहा गौड़ा ने
गौड़ा ने कहा है कि हमारे मंत्रालय ने लॉ कमीशन को चिट्ठी लिख कर यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में स्टडी करके एक रिपोर्ट देने को कहा है. उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड बीजेपी के एजेंडे में है और संसद के बाहर और अंदर इस बारे में चर्चा होती रहती है तो इसको लेकर हमने काम किया.
 
गौड़ा ने कहा कि सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दायर किए जाने से पहले वह प्रधानमंत्री, अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और सीनियर लॉ ऑफिसरों से सलाह मशविरा करेंगे. उन्होंने कहा कि आम सहमति बनाने के लिए विभिन्न पर्सनल लॉ बोर्डों और दूसरे स्टेक होल्डर्स से व्यापक मशविरा किया जाएगा और इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है.
 
उन्होंने कहा, ‘हमारे संविधान की प्रस्तावना और आर्टिकल 44 कहता है कि एक समान नागरिक संहिता होनी चाहिए. राष्ट्रीय एकता के हित के लिए, निश्चित तौर पर एक समान नागरिक संहिता जरूरी है. यद्यपि यह बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है. इस पर व्यापक चर्चा की जरुरत है. यहां तक कि समुदायों में, पार्टी लाइन से ऊपर, यहां तक कि विभिन्न संगठनों के बीच एक व्यापक चर्चा जरूरी है.
 
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क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड
यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का मतलब ये है कि देश के हर नागरीक के लिए एक समान कोड होगा. शादी, तलाक और जमीन जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा. फिलहाल हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ के तहत करते हैं.