नई दिल्ली. जून में कम बारिश ने सभी को निराश कर दिया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जून में मानसून अनुमान से ग्यारह फीसदी तक कम रहा है. इसका मुख्य कारण मानसून का 8 दिन देरी से आना है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई के महीने में इसकी भरपाई हो जाएगी.
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
भारत में मानसून का आगमन 8 जून को हुआ था, उस हिसाब से अभी महज 3 हफ्ते ही बादल बरसे हैं. मौसम विभाग के वैज्ञानिक बीपी यादव का कहना है कि अभी तक के आंकड़ों से यह पता चलता है कि मानसून में 11 प्रतिशत की कमी आई है. विभाग के मुताबिक दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा मानसून दर्ज किया गया है.
 
Stay Connected with InKhabar | Android App | Facebook | Twitter
 
विभाग का कहना है कि मानसून जुलाई की शुरुआत से ही रफ्तार पकड़ लेगा. बता दें कि जुलाई खरीफ की फसलों की बुआई के लिए सबसे अच्छा महीना माना जाता है. अगर बारिश अच्छी होती है तो फसल भी अच्छी होगी.