बैंगलुरू. एक लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को तेजस विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो गया. इसका पहला स्क्वाड्रन सिर्फ 2 विमानों के साथ शुरु किया जा रहा है. वहीं साल के अंत तक 4 और विमानों को शामिल करने की योजना है. तेजस दुनिया का सबसे हल्का और छोटा लड़ाकू विमान है जो अपनी रफ़्तार और सटीकता के लिए जाना जाता है. 
 
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पूरी तरह MAKE IN INDIA है तेजस
वायुसेना के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब देश में निर्मित किसी युद्धक विमान की स्क्वाड्रन का सपना साकार होने जा रहा हैय हालांकि, इस स्क्वाड्रन में अभी सिर्फ दो ही विमान होंगे और इसे भरने के लिए लंबा इंतजार करना होगा.
 
क्या है तेजस?
लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) प्रोग्राम को मैनेज करने के लिए 1984 में एलडीए (एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी) बनाई गई थी. एलसीए ने पहली उड़ान 4 जनवरी 2001 को भरी थी. अब तक यह कुल 3184 बार उड़ान भर चुका है.  तेजस 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. तेजस के विंग्स 8.20 मीटर चौड़े हैं. इसकी लंबाई 13.20 मीटर और ऊंचाई 4.40 मीटर है. वजन 6560 किलोग्राम है.
 
अभी हथियारों से लैस नहीं
वायुसेना अधिकारियों के अनुसार अभी तेजस में हथियार फिट नहीं हैं. अगले साल के अंत तक इसे हथियारों से लैस किया जाएगा. उसके बाद यह पूर्ण रूप से लड़ाकू विमान बन जाएगा.
 
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40 कमियां दूर की
तेजस में शुरुआती दौर में करीब 40 कमियां थी, जिन्हें अब दूर कर लिया गया है. इन विमानों में अब सिर्फ 18 मामले हैं, जिनका समाधान होना अभी बाकी है. लेकिन ये ज्यादातर रखरखाव से संबंधित हैं. इसलिए यह कोई समस्या नहीं है.