नई दिल्ली. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से निराश केन्द्रीय कर्मचारियों की हड़ताल पर जाने की घोषणा को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अनुचित बताया है. जेटली ने कहा कि इसके लागू होने पर उनका वेतन निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की तुलना में अधिक हो जायेगा.  
 
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जेटली ने चर्चा में कहा कि सातवें वेतन आयोग ने आईआईएम अहमदाबाद से एक अध्ययन कराया था, जिसमें यह पता चला है कि केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन वर्तमान में सात हजार रुपये है जो 125 फीसदी महंगाई भत्ता तथा दूसरे भत्ते मिलाकर 22 हजार रुपये से अधिक हो जाता है, जबकि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का औसत न्यूनतम वेतन नौ हजार रुपये है.
 
वहीं दूसरी ओर केन्द्रीय सरकारी कर्मचारी कन्फेडरेशन ने सरकार की ओर से घोषित वेतन बढ़ोतरी को खारिज कर दिया है. साथ ही अगले सप्ताह से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है, इनको केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन मिला. कन्फेडरेशन ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर कैबिनेट द्वारा मंजूर वेतन वृद्धि स्वीकार नहीं है.
 
आरएसएस सम्बद्ध भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और अन्य ट्रेड यूनियनों ने भी बढ़ोतरी को खारिज किया और कहा कि पिछले 17 वर्षों में यह न्यूनतम बढ़ोतरी है जिससे न्यूनतम और अधिकतम वेतन में अंतर बढ़ेगा.
 
कन्फेडरेशन आफ सेंट्रल गवर्नमेंट इम्प्लाइज एंड वर्कर्स, तमिलनाडु के महासचिव एम दुरई पांडियन ने कहा कि वर्तमान आर्थिक स्थितियों में वेतन आयोग के अनुसार वर्तमान बढ़ोतरी अपर्याप्त है। यह हमें स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने बढ़ोतरी की समीक्षा करने की उसकी मांग पर ध्यान नहीं दिया तो कन्फेडरेशन अनिश्चित कालीन हड़ताल 11 जुलाई की बजाय चार जुलाई से करने के लिए बाध्य होगा।
 
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केंद्र की वेतन बढ़ोतरी को यूनियनों ने किया खारिज, हड़ताल पर जाने की चेतावनी आरएसएस सम्बद्ध भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और अन्य ट्रेड यूनियनों ने भी बढ़ोतरी को खारिज किया और कहा कि पिछले 17 वर्षों में यह न्यूनतम बढ़ोतरी है जिससे न्यूनतम और अधिकतम वेतन में अंतर बढ़ेगा।