सियोल. न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (NSG) देशों की मीटिंग का शुक्रवार को दूसरा और अंतिम दिन है. एनएसजी में भारत की सदस्यता के लिए चीन के बाद स्विटजरलैंड ने भी विरोध किया है. इधर, पाकिस्तान भारत को मिल रहे चौतरफा सपोर्ट से बौखला गया है. वहां के नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर (एनएसए) नसीर खान जंजुआ ने कहा है कि एनएसजी को लेकर अमेरिका जितना भारत का सपोर्ट करेगा, उतनी पाकिस्तान की चीन से नजदीकी बढ़ेगी. 
 
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चीन करता रहा विरोध
चीन ने बार बार कहा है कि भारत की सदस्यता एजेंडा में नहीं है और समझा जाता है कि भारत की कोशिशों पर किसी भी चर्चा को रोकने के लिए हर कोशिश की. जापान ने सुबह के सत्र में भारत का मामला उठाया जिसके बाद वह राजी हुआ. 
एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध चीन के साथ ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और ब्राजील समेत अन्य देशों ने किया है. अन्य देशों ने सवाल किया कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं करने वाले भारत जैसे देश को समूह में कैसे शामिल किया जा सकता है? 
 
 
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में भाग लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ताशकंद पहुंचने के बाद उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. इस दौरान पीएम मोदी ने चीन के सामने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का मुद्दा उठाया और एनएसजी पर चीन से समर्थन की अपील भी की. ताशकंद में एससीओ सम्मेलन 23-24 जून को होना है. 
 
 
चीन के कड़े विरोध बावजूद फ्रांस ने भी भारत का पुरजोर समर्थन किया है. 48 सदस्यीय एनएसजी के प्रमुख सदस्य देश फ्रांस ने कहा कि परमाणु नियंत्रण व्यवस्थाओं में भारत की सहभागिता संवेदनशील वस्तुओं के निर्यात को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद करेगी, चाहे वे परमाणविक हों, रासायनिक हों, जैविक हों, बैलिस्टिक हों या परंपरागत सामग्री और प्रौद्योगिकी हों.
 
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