नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि बलात्कार के मामले पीड़ित का बयान ही उच्च दर्ज़े का और विश्वसनीय हो तभी किसी को दोषी ठहराया जा सकता है. दिल्ली हाई कोर्ट ने बलात्कार के एक मामले के आरोपी को बरी करते हुए कहा कि मौजूदा मामले में लड़की का बयान विश्वसनीय नहीं है और ऐसे में आरोपी को बरी किया जाता है.
 
निचली अदालत ने आरोपी को सजा सुनाई थी जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया. 
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का हवाला देकर कहा कि पीड़ित के बयान को तरजीह दिया जाना चाहिए लेकिन अभियोजन पक्ष को केस बिना संदेह साबित करना होता है. ऐसा पूर्वानुमान नहीं किया जा सकता कि पीड़ित हमेशा सही ही बोलेगी.
 
सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य फ़ैसले राजू बनाम स्टेट ऑफ एमपी का भी हाई कोर्ट ने हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि पीड़ित बलात्कार के कारण जबर्दस्त  शर्मिंदगी या निरादर का शिकार होती है लेकिन ठीक इसके विपरीत अगर आरोपी झूठा हो तो आरोपी भी उतना ही शर्मिंदगी या निरादर होता है ऐसे में झूठे आरोपों से आरोपी को सुरक्षित करने की भी जरूरत है.
 
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मौजूदा केस में पीड़ित ये साबित करने में विफल रही कि उसके साथ आरोपी ने धमकी देकर सहमति ली. अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे. लड़की का बयान अविश्वसनीय है और ऐसे में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ता की अर्जी को स्वीकार की जाती है और उसे बरी किया जाता है. 
 
मामला सदरबाजार इलाके का
पुलिस के मुताबिक आरोपी मोम्मद बिलाल के खिलाफ महिला ने आरोप लगाया था कि उसके साथ रेप किया गया. चार्जशीट के मुताबिक आरोपी ने लड़की की मर्जी के खिलाफ जबरन संबंध बनाए और रेप किया. 28 फरवरी 2014 को इस मामले में दी गई शिकायत पर रेप का केस दर्ज किया गया. महिला ने मैजिस्ट्रेट के सामने भी बयान दर्ज कराया था.
 
इस मामले में आरोपी ने तमाम आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उसकी दोस्ती थी लेकिन उसने कोई संबंध नहीं बनाए. महिला के पति ने महिला के आसपास उसे देख लिया था इसी कारण उसे फंसाया गया. 
 
हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की का बयान है कि उसकी आरोपी के साथ दोस्ती थी. दोनों ने एक दूसरे को नंबर दिया था. लड़की का बयान है कि इसी दौरान आरोपी ने उससे 50 हजार रुपये उधार लिए थे लौटाने के लिए उसे गली में बुलाया था और वहीं जबरन रेप किया.
 
साथ ही धमकी भी दी और बाद में कई बार संबंध बनाए. निचली अदालत ने आरोपी को रेप में दोषी करार दिया. मामला हाईकोर्ट में आया. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि लड़की का बयान कई स्टेज पर हुआ और बयान में विरोधाभास पाया गया है. ये तय है कि दोनों में दोस्ती थी.
 
अभियोजन पक्ष ये साबित करने में विफल रहा कि संबंध जबरन बनाया गया. मौके पर पीड़ित ने शोर नहीं मचाया. अगर उसकी सहमति नहीं थी को एफआईआर करने में देरी क्यों हुई. इस बात का सबूत नहीं है कि जिस परिस्थिति में संबंध बनाए गए वह बिना मर्जी के थे.
 
लड़की बालिक है और समझदार है उसे पता था कि उसके साथ क्या हो रहा है. ऐसे में एफआईआर में तीन माह की देरी क्यों ही उसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है. अदालत ने महिला के बयान को अविश्वसनीय करार दिया.