नई दिल्ली. साल 2014 में डेनमार्क की एक 52 साल की महिला से गैंगरेप मामले में तीस हज़ारी कोर्ट ने पांचों दोषियों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई. साथ ही 50 हज़ार का जुर्माना भी लगाया. अपहरण के तहत 10 साल की कैद,  डकैती के तहत 10 साल और धमकी के तहत 7 साल की सज़ा सुनाई.
 
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सजा सुनाने के दौरान कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा कि तीस हज़ारी कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा की दोषियों ने जो अपराध किया है वो अमानवीय है. महिला एक विदेशी नागरिक थी वो इस विश्वास पर भारत आई थी की वो सुरक्षित रहेगी. वो घूमने के दौरान सुरक्षित थी लेकिन जब वो वापस होटल आ रही थी तो वो रास्ते को लेकर कन्फ्यूज्ड हो गई और जब उसने इन लोगों से रास्ता पूछा तो इन्होंने उसकी मदद करने के बजाय पीड़ित को गुमराह कर उसका अपहरण किया. बर्बर तरीके से उसका गैंगरेप किया और अपनी वासना को शांत किया फिर उसके साथ लूटपाट की. 
 
दोषियों को महिला का आदर करना चाहिए था वो भी तब जब वो विदेशी नागरिक हो क्योंकि इनके वज़ह देश में पैसे भी आते है. लेकिन दोषियों की इस हरकत से हमारे देश के छवि को धक्का लगा है. ये किसी तरह की उदारता के हक़दार नहीं है. पांच घंटों तक लगातार पीड़ित के साथ इन दोषियों ने अमानवीय काम किया. दोषियों ने पीड़ित पर उस समय कोई दया नहीं दिखाई जब पीड़ित ने कहा उसको एड्स है। ऐसे में ये दोषी भी किसी दया के हक़दार नहीं है.  
 
गुरुवार को तीसहजारी कोर्ट में सजा पर बहस के दौरान पुलिस ने सभी दोषियों के लिए उम्र कैद की सज़ा की मांग की थी. वही दोषियों के वकील ने कम से कम सज़ा की कोर्ट से गुजारिश की थी और कहा था कि दोषियों के उम्र 20 से 30 साल के बीच है ऐसे में उन्हें उम्र कैद की सज़ा न दी जाये.
 
इससे पहले कोर्ट ने गैंगरेप मामले में अर्जुन, राजू , मोहम्मद रजा, महेन्द्र, और राजू बज्जी दोषी करार दिया था. इन पांचों को अदालत ने बलात्कार और लूटपाट का दोषी माना था. इस मामले में एक और आरोपी श्याम लाल की मौत पिछले साल तिहाड़ जेल में हो गई थी. जबकि तीन आरोपी नाबालिग लड़कों पर JJB में केस चल रहा है.
 
पिछले बुधवार को दोनों पक्षों की आखिरी दलीलें सुनने के बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बुधवार को इस मामले में बचाव पक्ष ने अपनी अंतिम दलीलें पूरी करते हुए कहा कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है. उनके खिलाफ मामले में कोई ठोस सबूत नहीं है. लिहाजा, उन्हें मामले में बरी किया जाना चाहिए.
 
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मामले में घटना 14 जनवरी 2014 की है। घटना वाले दिन डेनमार्क की महिला से 9 लोगों ने गैंग रेप किया था. पुलिस ने विदेशी महिला की शिकायत पर 9 लोगों को गिरफ्तार किया था जिनमें 3 जूवेनाइल शामिल थे.