नई दिल्ली. मथुरा में हुई ही हिंसा का मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुंच गया है. बीजेपी नेता अश्वनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है. याचिका में कहा गया है मामले की सीबीआई जांच से ही सच सामने आ सकता है. कोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई को तैयार हो गया है. मंगलवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. 
 
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बीजेपी नेता अश्वनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा है कि रामवृक्ष यादव 2014 से पार्क में एक समानांतर सरकार चला रहा था. जिसमें उसकी खुद की सरकार और सेना थी. बिना सरकार के समर्थन के ऐसा संभव ही नहीं है. याचिका में मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कहा गया है कि रामवृक्ष यादव कई नेताओं और मंत्रियों का क़रीबी रहा है.
 
2014 से जवाहर पार्क में उसकी शस्त्र सेना थी लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उसके खिलाफ कोई करवाई नहीं की. इतना ही नहीं उसका न तो सुभाष चंद्र बोस और न ही फॉरवर्ड ब्लॉक से उसका कोई सम्बन्ध है. 
 
याचिका में कहा गया है की रामवृक्ष यादव की संस्था ने कई राज्यों में अवैध रूप से कब्ज़ा जमाये हुए है. जब एक बार संस्था ने पार्क में अवैध कब्ज़ा जमा लिया था प्रशासन ने उसको खाली कराने की कोशिश नहीं की. इसलिए आगे चल वो हेडक्वाटर बन गया. हिंसा के दौरान पुलिस के दो जवान शहीद हो गए उनमें से एक एसपी और एसएचओ थे. 
 
2014 और 2016 के बीच ग्रुप ने एक समुदाय बना लिया. उन्होंने पार्क में टॉयलेट, झोंपड़ी बना लिया, वो सब्जी उगा रहे थे और किसी भी बाहरी को पार्क में आने की इजाजत नहीं देते थे. पार्क में 20 लाख किलो खाद्यान्न, 200 कार, और 400 गैस सिलेंडर जमा कर रखे थे. पार्क के भीतर उन्होंने अलग देश जैसा बना लिया था. जिसमें उनका अपना संविधान, कानून वयस्था, कैद खाना, न्याययपालिक और आर्मी बना ली थी. इतना सब जानते हुए भी स्थानीय प्रसाशन ने कोई करवाई नहीं की. 
 
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याचिका में ये भी कहा गया है कि पार्क में अवैध रूप से कब्जा करने वाले 22 लोगों की मौत हो गई. जिसमें से 11 की मौत सिलेंडर ब्लास्ट से हुई थी. 23 पुलिस वालों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जो गंभीर रूप से घायल थे. पुलिस ने हिंसा के बाद कैंप से 47 गन, 6 राइफ़ल और 179 हैण्ड ग्रेनेड बरामद किये गए थे.