नई दिल्ली. यौन प्रताड़ना के आरोपी और टेरी के अवकाश पर चल रहे महानिदेशक आर. के. पचौरी की जमानत रद्द करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पचौरी से जवाब मांगा है. यौन प्रताड़ना का आरोप लगाने वाली युवती की याचिका पर न्यायमूर्ति एस.पी. गर्ग ने पचौरी से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और मामले की सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तारीख तय की है.

पीड़िता के वकील मेंदीरत्ता ने न्यायालय को बताया, ‘यहां तक कि पुलिस ने भी निचली अदालत में कुछ दस्तावेजों के साथ आवेदन देकर बताया है कि पचौरी ने उन्हें मिली जमानत के दौरान उन पर लगाई कई शर्तो का उल्लंघन किया है और गवाहों को प्रभावित किया है.’ अधिवक्ता ने बताया, ‘पुलिस का यह भी कहना है कि पचौरी उनके साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं.’ मेंदीरत्ता ने दलील दी कि पचौरी एक ‘प्रभावशाली व्यक्ति’ हैं, जो पिछले करीब 34 साल से टेरी के शीर्ष पद पर हैं और वह इसके वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं.

युवती ने पचौरी की उस याचिका का भी विरोध किया है, जिसके जरिये उन्होंने निचली अदालत के उस फैसले में बदलाव की गुहार लगाई है, जिसके अनुसार उन्हें टेरी के परिसर में दाखिल होने से रोक दिया गया है. पचौरी ने फिलहाल टेरी से अवकाश ले रखा है. उन्होंने अदालत के पूर्व आदेश में संशोधन की गुहार लगाते हुए टेरी परिसर में स्थित दफ्तर से काम शुरू करने की अनुमति मांगी है. इसका विरोध करते हुए मेंदीरत्ता ने न्यायालय में कहा था, ‘पचौरी ने अदालत के आदेश में बदलाव की गुहार लगाई है, जहां से उन्हें अग्रिम जमानत मिली थी. लेकिन वह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और जब तक मामले की जांच जारी है, उन्हें टेरी के दफ्तर में दाखिल होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.’

पचौरी एक ‘प्रभावशाली व्यक्ति’ हैं, जो पिछले करीब 34 साल से टेरी के शीर्ष पद पर हैं और वह इसके वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं: याचीकर्ता के वकील

युवती ने इस साल फरवरी में पचौरी के खिलाफ यौन प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी. उसका आरोप है कि सितंबर 2013 में टेरी से जुड़ने के बाद से ही पचौरी ने उसका यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया था. अपने आरोप के समर्थन में उसने कई टेक्स्ट मैसेज, ईमेल और व्हाट्सएप मैसेज का जिक्र किया है.