नई दिल्ली. बिजली की लाइन बिछाने के लिए 493 पेड़ काटने को लेकर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय की केंद्रीय उच्चाधिकार समिति (सीईसी) से 4 हफ्तों में जवाब मांगा है. पश्चिम बंगाल में धनकुनी से शुरू होकर पंजाब में लुधियाना बिजली की लाइन बिछाने के लिए 493 पेड़ काटने की जरूरत है.
 
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दरअसल डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर कारपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बिजली की लाइन बिछाने के लिए ताज संरक्षित क्षेत्र में पेड़ काटने की इजाजत मांगी थी. शुक्रवार को इसी मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कारपोरेशन से पूछा था कि क्या इस मामले में सीईसी को पक्ष बनाया है या नहीं. तब कारपोरेशन ने कहा कि सीईसी को पक्ष इसलिए नहीं बनाया गया क्योंकि ऐसे मामलों में कोर्ट खुद ही समीक्षा के लिए सीईसी के पास याचिका भेजता है. 
 
कारपोरेशन की इस बात पर कोर्ट ने जवाब दिया कि यह बात कोर्ट को पता है. कोर्ट ने कहा कि याचिका की एक कॉपी सीईसी को दी जाए और याचिका का अध्यन करने के बाद 4 हफ्तों के भीतर ही रिपोर्ट सौंपना होगा.
 
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर कारपोरेशन ने अपनी याचिका में कहा था कि फरीदाबाद और आगरा के बीच से होकर गुजर रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर को बिजली आपूर्ति के लिए 132 केवी की बिजली लाइन बिछानी है. जिसके लिए 493 पेड़ काटने पड़ेंगे. ये पेड़ ताज संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. इसलिए इन्हें काटने से पहले कोर्ट की इजाजत की जरूरत है.
 
कारपोरेशन की अर्जी में कहा गया है कि 132 केवी की बिजली की ये लाइन ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर का हिस्सा है. ये कारीडोर पश्चिम बंगाल में धनकुनी से शुरू होकर पंजाब में लुधियाना तक जाता है. ये कारीडोर झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से होकर गुजरता है. इसका फिरोजाबाद और आगरा जिले में पड़ने वाला कुछ हिस्सा ताज संरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरता है.
 
अर्जी में कहा गया है कि डेडिकेटेड फ्रेड कॉरीडोर विश्व बैंक पोषित योजना है. ये राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है और देश की आर्थिक तरक्की के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है.
 
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