नई दिल्ली. वैसे तो सुप्रीम कोर्ट में दलील, बहस और सवाल जवाब के लिए अंग्रेजी का ही इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस नियम को ध्यान न देते हुए हिंदी में सवाल जवाब किए. दरअसल आज कोर्ट ने राजस्थान के कोटा के जुल्मी गांव से आई आदिवासी महिलाओं की सुविधा के लिए हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया.
 
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बता दें कि राजस्थान के इन आदिवासियों ने शिकायत की है कि खनन माफिया उनके गांव को तोड़ रहे हैं और गांववासियों को गांव छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है.
 
जस्टिस अमिताभ रॉय ने आदिवासी महिलाओं से हिंदी में पूछा कि क्या आप हिंदी बोलना जानती हैं, फिर क्या था कोर्ट ने उनके वकील को कहा आप इन्हें ही बहस करने दें. जस्टिस रॉय ने आदिवासी महिला से पहले उसका नाम पूछा, महिला ने जवाब में अपना नाम रेखा बताया. उसके बाद कोर्ट ने रेखा से उसके घर का पता जैसे कुछ औपचारिक सवाल हिंदी में किए.
 
जब इन सवालों के जवाब वह महिला हिंदी में देने में सहज महसूस करने लगी, तब रेखा ने जस्टिस अमिताभ रॉय के सवालों के जवाब देने शुरू कर दिए. रेखा ने कहा कि खनन माफिया उनको और पूरी बस्ती को वहां से भगा रहे हैं. रेखा ने बताया कि माफियाओं ने उन्हें धमकी भी दी है. उसने बताया कि बस्ती में 60 परिवार रहते थे. लेकिन बस्ती के 40 से ज्यादा घरों को तोड़ दिया गया है. 
 
आदिवासी महिला ने बताया कि माफियाओं ने गांव को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, वहां मंदिरों को भी तोड़ दिया गया है. उसने बताया कि वह इस मामले में शिकायत लेकर पुलिस के पास भी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की थी.
 
बता दें कि इस मामले में कोर्ट ने राजस्थान सरकार, मुख्य सचिव और राजस्थान के डीजीपी को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों में जवाब मांगा है. कोर्ट ने डीजीपी को कहा है कि जाँच कर रिपोर्ट अदालत में जमा करा दी जाए. आदिवासियों के वकील ने कोर्ट से तोड़ फोड़ पर रोक लगाने की मांग की, इसपर अदालत ने कहा कि कोर्ट का जाँच रिपोर्ट मांगना ही काफ़ी है. आदिवासी लोगों कि सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार लेगी.
 
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