अहमदाबाद. गुलबर्ग सोसाइटी केस में कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस की पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी पीड़िता जाकिया जाफरी ने असंतोष जाहिर किया है. उन्होंने कहा कि यह आधा न्याय है, जिसे मिलने में भी 14 साल लग गए. बता दें कि कोर्ट ने 66 में से 36 आरोपियों को बरी कर दिया है और वहीं 24 आरोपियों को दोषी करार दिया है. इस नरसंहार में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे. 39 लोगों के शव बरामद हुए थे और 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था. 
 
‘पूरा न्याय नहीं मिला’
जाकिया जाफरी ने कहा कि ‘मुझे पूरा न्याय नहीं मिला. ये आधा न्याय है. 14 साल बाद फैसला आया है, अभी 15 साल और लगेंगे, लेकिन ये लड़ाई जारी रहेगी.’ जाकिया ने कहा कि कोर्ट ने 36 लोगों को छोड़ दिया है. इसके लिए मैं आगे लड़ाई लडूंगी और मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाऊंगी.
 
बरी किए गए आरोपियों में BJP पार्षद शामिल
2002 में गोधरा कांड के बाद हुए गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले में एसआईटी कोर्ट ने 36 को बरी कर दिया है, जबकि 24 को दोषी करार दिया है. बरी किए गए आरोपियों में बीजेपी पार्षद विपिन पटेल भी शामिल हैं. अतुल वैध को कोर्ट ने दोषित करार किया गया. 24 दोषियों की सजा का ऐलान कोर्ट 6 जून को करेगी. 24 आरोपिओ में से 11 आरोपियों पर 302 की कलम लगाई गयी है.
 
SC की निगरानी में गठित हुई SIT
गुलबर्ग नरसंहार की जांच समय समय पर अलग-अलग एजेंसियां करती रही. लेकिन घटना के 7 साल बाद सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक एसआईटी गठित की गई. एसआईटी को गुजरात दंगों के 9 मामलों की जांच दी गई थी जिसमें से गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड एक है.