नई दिल्ली. जाट आरक्षण मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है. ओबीसी आरक्षण रक्षा समिति ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल कर दी है. जिसका मतलब है कि जाट नेता की याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से पहले उनके पक्ष को भी सुना जाये. इनखबर के पास कैविएट याचिका की कॉपी मोजदू हैं.
 
ओबीसी आरक्षण रक्षा समिति के अध्यक्ष ओमवीर सिंह ने इंडिया न्यूज़ से खास बातचीत में कहा कि हाईकोर्ट का अंतरिम रोक का आदेश बिलकुल सही है. ओमवीर सिंह के मुताबिक हरियाणा सरकार ने आरक्षण देने के लिए केसी गुप्ता की रिपोर्ट का सहारा लिया है जिसको सुप्रीम कोर्ट पहले ही ठुकरा चुका है. 
 
दरअसल पिछड़ा वर्ग के तहत जाटों और पांच अन्य समुदायों को दिए गए आरक्षण पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के अंतरिम रोक के फैसले को जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को चुनौती दे दी. याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने बिना सरकार का पक्ष सुने ही आदेश दे दिया. ऐसे में जब तक मामले की सुनवाई लंबित है तब तक अंतरिम रोक को हटाया जाये.
 
याचिका में आधार दिया गया है कि विधायिका द्वारा पारित किये गए कानून पर अंतरिम रोक नहीं लगाई जा सकती। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को जो अंतरिम राहत दी है वो अंतिम राहत की तरह है. याचिका में कहा गया है कि जनहित याचिका के जरिये किसी भी कानून को अल्ट्रावायरस घोषित नहीं कर सकते. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया गया है और कहा गया है कि जनहित याचिका के जरिये किसी भी कानून को रद्द नहीं किया जा सकता. इस याचिका को सुनवाई करने के लिए स्वीकार करने में हाईकोर्ट से कही न कही गलती हुई है.
 
इतना ही नहीं याचिका में ये भी कहा गया है कि इस समय शैक्षिक संस्थानों में दाखिले हो रहे है ऐसे में उन्हें ओबीसी कैटेगरी के तहत ही दाखिला दिया जाये. वही सरकारी नौकरी में भी उन्हें ओबीसी कैटेगरी का लाभ मिले.
 
दरअसल हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा नई बनाई गई पिछड़ा वर्ग :सी: श्रेणी के तहत जाटों और पांच अन्य समुदायों को दिए गए आरक्षण पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने यह आदेश हरियाणा पिछड़ा वर्ग (सेवाओं में और शिक्षण संस्थाओं में दाखिले में आरक्षण) अधिनियम 2016 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया.
 
इस कानून को 29 मार्च को राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया था. नया कानून जाट और पांच अन्य समुदायों को पिछड़ा वर्ग (सी) श्रेणी के तहत आरक्षण देता है. पांच अन्य समुदायों में जाट सिख, मुस्लिम जाट, बिश्नोई, रोर और त्यागी शामिल हैं. इन्हें सरकारी सेवाओं और शिक्षण संस्थानों में दाखिले में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है.