नई दिल्ली. पूर्व सांसद उमाकांत यादव को फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उमाकांत यादव उस याचिका पर जल्द सुनवाई से इंकार कर दिया जिसमें यादव ने अपने खिलाफ सात वर्ष की जेल की सजा को निलंबित करने की मांग की है. याचिका में पूर्व सांसद उमाकांत यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि वो छह साल दो महीने की सज़ा काट चुके है. ऐसे में जब तक उनका मामला सत्र न्यायालय में लंबित है तब तक उनकी सजा को निलंबित कर दिया जाये.
 
उमाकांत यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि वो तीन बार विधायक रह चुके है और एक बार सांसद रहे हैं. ऐसे में उत्तरप्रदेश में 2017 में होने वाले चुनाव वो लड़ना चाहते है. ये तभी संभव हो पाएगा जब सुप्रीम कोर्ट उनकी दोषसिद्धि को निलंबित कर दे. क्योंकि जन प्रतिनिधि कानून के तहत 2 साल से ज्यादा कि सज़ा पाये कोई भी विधायक और सांसद सज़ा पूरी होने के छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता.
 
बता दें कि उमाकांत यादव को जौनपुर के खुटहन थाना क्षेत्र के दौलतपुर पिलकिछा गांव की एक महिला की जमीन को फर्जी ढंग से कब्जाने और अपने नाम बैनामा कराने के मामले में जौनपुर कि निचली अदालत ने सात वर्ष की कैद की सज़ा सुनाई थी. वर्ष 1998 में राजाराम दुबे पुत्र भगेलूराम की जमीन का गीता ने अपने नाम बैनामा कराया था. उसी जमीन को उमाकांत यादव ने फर्जी ढंग से अपने नाम बैनामा करा लिया. पीड़िता गीता ने आरोप लगाया था कि उनकी जगह वह राजाराम दुबे की पत्नी गीता दुबे को खड़ा करके बैनामा करा लिया.