चंडीगढ़. पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जाट आरक्षण पर लगी रोक के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार और जाट संगठनों को कोई राहत नहीं दी है. जाट आरक्षण पर रोक के खिलाफ दायर अर्जी पर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले में स्टे देने से मना कर दिया है. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 6 जून को होगी.
 
जाट नेता ने दी है याचिका
इस मामले में हरियाणा सरकार और जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने जाट और छह जातियों को आरक्षण देने पर लगाई गई रोक को हटाने के लिए याचिका दी है. सुनवाई में हरियाणा सरकार की तरफ सुप्रीम कोर्ट के वकील जगदीप धनखड़ पेश हुए. अर्जी दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार और हवा सिंह सांगवान ने कहा था कि हाईकोर्ट ने मुरारी लाल गुप्ता की याचिका पर हरियाणा सरकार द्वारा जाटों सहित छह जातियों को आरक्षण देने का लाभ देने पर रोक को गलत है.
 
‘बिना पक्ष सुने दिया फैसला’
हरियाणा सरकार और सांगवान ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस रोक के फैसले से पहले हरियाणा सरकार और जाटों का पक्ष नहीं सुना है. जाट और सरकार दोनों इस मामले में प्रभावित हैं और ऐसे में उनका पक्ष सुने बगैर इस तरह को कोई निर्णय नहीं देना चाहिए. इससे हरियाणा में चल रही भर्तियों और दाखिलों पर प्रभाव पड़ रहा है.
 
हरियाणा में जाट आंदोलन को लेकर दिल्ली में हुई बैठक के बाद अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि हम पांच जून से जाट न्याय रैली करेंगे. मलिक ने कहा कि पिछले आंदोलन की तरह देश और प्रदेश की शांति भंग हो, इसके लिए इस बार शहरों से दूर यह धरने और प्रदर्शन किए जाएंगे. सरकार ने 22 फरवरी को समाज की जो मांगों का पूरा करने का वादा किया था, वह आज तक पूरा नहीं किया गया है.  
 
जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लिए पांच जून से हरियाणा में फिर से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है. जिसके बाद हरियाणा में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. राज्य के 8 जिलों में धारा 144 लगाई गई है.