अहमदाबाद. 2002 के गोधरा कांड के बाद गुलबर्ग सोसायटी में हुए दंगों के मामले में एसआईटी कोर्ट ने 66 में से 36 आरोपियों को बरी कर दिया है और वहीं 24 आरोपियों को दोषी करार दिया है. कोर्ट 6 जून को दोषियों की सजा सुनाएगा. 14 साल बाद इस मामले में विशेष अदालत ने फैसला सुनाया है. बता दें कि इस नरसंहार में  कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे. 39 लोगों के शव बरामद हुए थे और 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था.  
 
’31 मई को फैसला सुनाने को कहा था’
विशेष अदालत के न्यायाधीश पी बी देसाई 22 सितंबर 2015 को ट्रायल संपन्न होने के आठ महीने से भी ज्यादा समय बाद ये फैसला सुनाएंगे. मामले की निगरानी कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी अदालत को निर्देश दिया था कि वह 31 मई तक अपना फैसला सुनाए. 
 
बरी किए गए आरोपियों में BJP पार्षद शामिल
2002 में गोधरा कांड के बाद हुए गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले में एसआईटी कोर्ट ने 36 को बरी कर दिया है, जबकि 24 को दोषी करार दिया है. बरी किए गए आरोपियों में बीजेपी पार्षद विपिन पटेल भी शामिल हैं. अतुल वैध को कोर्ट ने दोषित करार किया गया. 24 दोषियों की सजा का ऐलान कोर्ट 6 जून को करेगी. 24 आरोपिओ में से 11 आरोपियों पर 302 की कलम लगाई गयी है.
 
SC की निगरानी में गठित हुई SIT
गुलबर्ग नरसंहार की जांच समय समय पर अलग-अलग एजेंसियां करती रही. लेकिन घटना के 7 साल बाद सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक एसआईटी गठित की गई. एसआईटी को गुजरात दंगों के 9 मामलों की जांच दी गई थी जिसमें से गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड एक है. 
 
जकिया जाफरी की लड़ाई
77 साल की जकिया जाफरी अपने शौहर और कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी को खोया था. 14 साल से बीमारी के बावजूद वो लगातार अलग-अलग एजेंसियों में न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं. एसआईटी से लेकर कोर्ट तक हर जगह उन्‍होंने लड़ाई लड़ी है. उसे उमीद है कि हत्याकांड करनेवालों को भुक्तभोगियों की आह लगेगी.   
 
2 आरोपियों की अर्जी खारिज कर दी थी
पिछले हफ्ते अदालत ने नारायण टांक और बाबू राठौड़ नाम के दो आरोपियों की ओर से दायर वह अर्जी खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए नार्को अनालिसिस और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की गुहार लगाई थी. अदालत ने कहा कि अब जब फैसला आने वाला है तो इसकी जरूरत नहीं है. गुलबर्ग सोसाइटी मामला 2002 के गुजरात दंगों के उन नौ मामलों में से एक है जिनकी जांच सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एसआईटी कर रही है.