नई दिल्ली. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू ने एनएचआरसी को बिना दांतों वाला शेर बताया है. दत्तू ने बुधवार को कहा कि वॉचडॉग को नियम-कानून लागू कराने के लिए कुछ शक्तियों की भी जरूरत होती है, लेकिन आयोग के पास पर्याप्त शक्तियां नहीं है.
 
उन्होंने कहा है कि मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में अपनी सिफारिशें मनवाने के लिए आयोग को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए हैं. 
 
पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘एनएचआरसी बिना दांत वाला शेर है. हम काफी मेहनत के साथ मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच करते हैं, कभी-कभी हम ऐसे इलाकों में भी अपनी पहुंच बनाते हैं जहां तक पहुंच पाना काफी मुश्किल होता है. आयोग कम संसाधनों में भी अपना काम अच्छे से करने की पूरी कोशिश करता है. आयोग के अध्यक्ष और इसके सदस्य जो कि पूर्व न्यायाधीश होते हैं, ऐसे इलाकों से साक्ष्य इकट्ठा करके उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए देते हैं.’
 
पूर्व मुख्य न्यायाधीश क कहना है कि जब किसी मामले की सारी जांच हो जाती है तो एनएचआरसी उसके आधार पर केवल सिफारिश कर सकता है या राज्य की सरकारों को संबंधित पक्ष को मुआवजा देने के लिए सिफारिश कर सकता है.
 
दत्तू ने कहा, ‘हम किसी मामले से संबंधित अधिकारी को पत्र लिख कर सुझाव देते हैं, लेकिन यह उनके ऊपर है कि वह उसे मानते हैं या नहीं.’