नई दिल्ली. जहां एक ओर पूरे प्रदेश में जाट आरक्षण को लेकर बहस छिड़ी है वहीं अब आरक्षण का लाभ ले रही पिछड़ा वर्ग में शामिल जातियों को लेकर मामला न्यायालय में पहुंच गया हैं. भिवानी और हिसार की समाजसेवी संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके वर्तमान में ओबीसी के तहत घोषित जातियों को आरक्षण का मामला पुर्ननिरीक्षण के लिए उठाया है. 
 
भिवानी के एडवोकेट निर्मल प्रकाश और कुम्हार महासभा हिसार द्वारा एक याचिका दायर की गई है. जिसमें कहा गया है कि देश में ओबीसी को आरक्षण का लाभ दिए 23 वर्ष हो चुके हैं लेकिन अभी तक ओबीसी में शामिल जातियों के पुर्ननिरीक्षण बारे कोई कदम नहीं उठाया गया. जबकि संसद द्वारा 1993 में गठित राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को प्रत्येक दस वर्ष में आरक्षण का लाभ ले रही जातियों का निरीक्षण करना आवश्यक है. कमीशन के एक्ट की धारा 11 के अब तक यह पुर्ननिरीक्षण हो जाना चाहिए था.
 
याचिका में कहा गया है की कहा है कि पुर्ननिरीक्षण न होने से वे जातियां भी आरक्षण का लाभ ले रही हैं जो कि वर्तमान में पिछड़ी नहीं रही हैं. इसके कारण अन्य पिछड़ी जातियों को नुकसान हो रहा है और यह संविधान की भावना के भी विपरीत है.
 
बता दें कि पिछले साल जाट आरक्षण की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यादव, गुर्जर व सैनी आदि अन्य जातियों पर आरक्षण का लाभ लेने पर सवाल उठे थे. कोर्ट ने उस वक्त कहा था कि अगर कोई जाति आरक्षण का लाभ ले रही है और अब वह जाति पिछड़ी नहीं है तो उसे आरक्षण की सूची से हटाने के लिए एक्ट ने पुर्ननिरीक्षण का प्रावधान है.