नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट से सरकारी जमीन पर बने प्राइवेट स्कूलों को फीस बढ़ाने के मामले में राहत नहीं मिली. इससे पहले कोर्ट ने सरकार के उस बयान को रिकॉर्ड पर लिया जिसमें कहा गया कि सरकार की मंजूरी के बिना स्कूल फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. बहरहाल स्कूलों को अपने रिकॉर्ड व दस्तावेज सरकार के सामने पेश करने के लिए 31 जुलाई तक के लिए मोहलत मिल गई है.
 
दिल्ली सरकार ने सर्कुलर जारी कर कहा है कि सरकार की मंजूरी के बगैर प्राइवेट स्कूल अपनी फीस नहीं बढ़ाएंगे और 31 मई तक स्कूल अपना रिकॉर्ड सरकार के सामने पेश करेंगे और फिर सरकार की मंजूरी होती है उसके बाद ही फीस बढ़ा सकते हैं. स्कूलों के एसोसिएशन ने इस मामले में हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि रेकॉर्ड पेश करने के लिए उन्हें 31 जुलाई तक की मोहलत दी जाए साथ ही इस दौरान उन्हें फीस बढ़ाने की इजाजत दी जाए. दिल्ली सरकार ने इस अर्जी का विरोध किया.
 
दरअसल 19 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने आदेश जारी कर कहा था कि प्राइवेट अनएडेड स्कूल जिन्हें डीडीए ने लैंड अलॉट किया है उन्हें फीस बढ़ाने से पहले सरकार से मंजूरी लेनी होगी. स्कूल फीस बढ़ोतरी के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले एडवोकेट खगेश झा ने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने 19 जनवरी को अपने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि स्कूल को मुनाफाखोरी और कमर्शलाइजेशन की इजाजत नहीं दी जा सकती.
 
दिल्ली सरकार की ओर से कहा गया कि उन्हें रिकॉर्ड पेश करने के मामले में 31 जुलाई तक की समय सीमा देने में उन्हें ऐतराज नहीं है लेकिन सरकार जब रिकॉर्ड देखेगी और उसके बाद ही फीस बढ़ोतरी के मामले में मंजूरी देगी. अदालत ने दोनों पक्षों के बयान को रिकॉर्ड पर ले लिया.